राजस्थान में मानसून कमजोर, खरीफ बुवाई 70 फीसदी, पश्चिमी जिले अब भी सूखे

नई दिल्ली 28-Jul-2026 02:12 PM

राजस्थान में मानसून कमजोर, खरीफ बुवाई 70 फीसदी, पश्चिमी जिले अब भी सूखे

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। आषाढ़ी में मानसून की धोखाधड़ी से किसानों की चिंता गहराने लगी है। बारिश की कामना को लेकर गांव-शहर टोने टोटकों का दौर शुरू हो गया है। कोई घास भैरू की सवारी निकाल रहा है तो कोई मेढक़-मेढक़ी की शादी करवा रहा है। लेकिन, इन्द्रदेव की मेहर अब भी पूरे प्रदेश में देखने को नहीं मिल रही है। हालांकि, दक्षिणी-पूर्वी जिलों में मध्यम से तेज बारिश से खरीफ फसलों को जीवनदान मिला है। लेकिन, पश्चिमी राजस्थान अब भी बारिश को तरस रहा है। गौरतलब है कि मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी संभाग में बारिश का अलर्ट जारी किया था। बारिश भी हुई। लेकिन, कही स्थानों पर धरती की प्यास नहीं बुझ पाई। उधर, प्रदेश में खरीफ फसलों की बुवाई निर्धारित लक्ष्य से 70 फीसदी हो चुकी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र सिंह के अनुसार बारिश नहीं होने का सबसे ज्यादा प्रभाव बाजरे की फसल पर पड़ेगा। क्योंकि, बाजरा खरीफ की मुख्य फसल है। बारानी खेती करने वाले किसान दाना और चारा उत्पादन के लिए बाजरे की बुवाई को प्राथमिकता देते आए है।  उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अब तक बाजरे की बुवाई 29.99 लाख हैक्टयर में हो चुकी है। बुवाई का यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य का 74 फीसदी है। ऐसे में समझा जा सकता है कि बारिश की कमी इंसानों और पशुधन पर निकट भविष्य में क्या असर छोड़ेगी। कृषि जानकारों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में बाजरा फसल का रकबा गिरा तो पशुपालकों के सामने चारे का संकट गहरा जायेगा। हालांकि, छिटपुट  बारिश से अगेती बोयी गई खरीफ फसल को जीवनदान मिला हैं। कृषि जानकारों का मानना हैं कि चालू माह में मानसून का पूरी तरह से सक्रिय होना जरूरी है। नहीं तो दलहन की बुवाई पर भी फर्क साफ नजर आयेगा। गौरतलब है कि मानसून के सुस्त रहने से सोयाबीन, धान, मक्का, बाजरा की फसल, मूंगफली, कपास की फसल सूखने की आशंका बढ़ गई थी। अगर समय पर बरसात नहीं आती तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता था। 

पिछडऩे लगी खरीफ बुवाई

कृषि विभाग के बुवाई आंकड़ो पर नजर डाले तो प्रदेश में खरीफ फसलो की बुवाई गत वर्ष की तुलना में पिछडऩे लगी है। पिछले साल समानावधि में 1.32 करोड़ हैक्टयर में खरीफ की बुवाई हो चुकी थी। जबकि, इस वर्ष 1.15 करोड़ हैक्टयर क्षेत्र में ही फसल की बुवाई अब तक हो पाई है। इससे साफ जाहिर है कि बारिश की कमी ने फसल बुवाई के आंकड़ो पर बे्रक लगाना शुरू कर दिया है। 

100 मिमी से बरसात जरूरी

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि जिस क्षेत्र में 100 मिलीमीटर से कम बरसात हुई है। वहां पर किसी भी स्थिति में बुवाई नहीं की जाए। इससे कम बरसात में जमीन में पर्याप्त नमी नहीं होती है। ऐसे में बुवाई करने से बीज को नुकसान पहुंचता है। उसमें कीट लगने की संभावना बनी रहती है।

सब्जियों का महंगा बीज बोया

किसानों ने इस बार अच्छी बारिश की उम्मीद को लेकर अपने खेतों में बाजार से महंगे महंगे दामों पर हाइब्रिड सब्जियों के बीज खरीदकर लाए और उन्हें उपचारित कर क्यारियों में बोया। बारिश की बेरुखी के चलते अब किसानों को कुओं और नलकूप का सहारा लेकर बीज को नष्ट होने से बचाने का जतन कर रहे हैं। 

बाजरा, मक्का और ज्वार की बुवाई लक्ष्य से पिछड़ सकती हैं। इस कारण मूंग, मोठ, उड़द के रकबे में बढ़ोतरी होने की उम्मीद हैंं। 

  • धान - 2. 28
  •   ज्वार -5.18 
  • बाजरा - 28.15
  • मक्का - 8.51  
  • मूंग - 29.99
  • मोठ -5.02 
  • उड़द - 3.25
  • चंवला -0.55  
  • तिल - 0.98
  • मूंगफली - 10.04 
  • सोयाबीन- 8.77
  • ग्वार -12.35  
  • कपास - 5.26 

(फसल बुवाई लाख हैक्टयर में)


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