युद्ध का असर: सब्जियों के दाम गिरे, किसानों को हो रही यह परेशानी
(सभी तस्वीरें- हलधर)मध्य-पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब राजस्थान के सब्जी उत्पादक किसानों तक भी पहुंच गया है। निर्यात प्रभावित होने से सब्जियों के दाम में गिरावट देखी जा रही है। कोटा शहर की फल-सब्जी मंडियों में इनदिनों भाव काफी नीचे आ गए हैं। विशेषकर आलू और प्याज के भाव में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि, इससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। खुदरा बाजार में जहां प्याज 100 रुपए में 6 किलो प्याज, वहीं इतने ही रुपए में 5-10 किलो आलू मिल रहा है, जो किसानों के लिए घाटे का सौदा बनता जा रहा है।
ज्यादा आवक बनी मुख्य वजह
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में अधिक आवक और निर्यात में कमी की वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस समय प्याज की सप्लाई मुख्य रूप से मध्यप्रदेश से हो रही है, जबकि अगले माह नासिक से नई खेप आने की संभावना है। वहीं आलू की अधिक पैदावार उत्तर प्रदेश के हाथरस क्षेत्र में होने से वहां से भारी मात्रा में आवक हो रही है, जिससे दाम लगातार गिर रहे हैं।
किसानों को नुकसान, उपभोक्ताओं को राहत
कम भाव मिलने के कारण किसानों को अपनी लागत तक निकालना मुश्किल हो रहा है। दूसरी ओर, आम जनता को सस्ती सब्जियों का लाभ मिल रहा है। गर्मी के मौसम में आमतौर पर सब्जियों के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार भिंडी को छोड़कर अधिकांश सब्जियां सस्ती या स्थिर बनी हुई हैं।
निर्यात और वैश्विक हालात का असर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने हालात और निर्यात प्रभावित होने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ गई है। इसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। व्यापारियों का मानना है कि यदि निर्यात दोबारा सुचारु होता है तो दामों में सुधार संभव है।
कोटा मंडी में प्रमुख सब्जियों के भाव (रुपये/किलो)
भिंडी: 30–35 (थोक) | 70–80 (खुदरा)
टमाटर: 10–15 | 20–25
लौकी: 7–8 | 10–15
मिर्च: 15–20 | 30–35
खीरा: 10–15 | 20–25
शिमला मिर्च: 20–25 | 30–40