गेहूं-जौ पर मंडराया रोली रोग का खतरा, वैज्ञानिकों की बड़ी चेतावनी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। तेजी सर्दी को सभी गेहूं-जौ की फसल के लिए अच्छा बता रहे है। लेकिन, मौसम में बार-बार आ रहा बदलाव उत्पादन की कुछ और ही कहानी कहने लगा है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो गेहूं-जौ की फसल में इस स्थिति में पीली-भूरी रोली रोग का शिकार हो सकती है। गौरतलब है कि तेज सर्दी को लेकर अमूमन यह कहा जाता है कि इससे गेहूं के पौधों में फुटाव ज्यादा होगा और पैदावार बढ़ेगी। गेहूं पौधों के अंदर टिलरिंग ज्यादा होगी। जिससे हर टिल्लर पर एक समान बाली निकलेगी। जितने बाल निकलेंगे उतनी ही ज्यादा पैदावार होगी। लेकिन, यह मौसम फिलहाल गेहूं के लिए अच्छा नहीं है। मौसम विभाग का कहना है कि पारे में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

यह है लक्षण
उन्होंने बताया कि पीली रोग का प्रकोप खेत के एक छोटे भाग में पीले धब्बे के रूप में दिखाई देता है। परंतु समय पर रोग का निदान नहीं होने के चलते यह रोग धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाता है। रोगग्रस्त पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले, नारंगी रंग की धारियां बन जाती है। कुछ दिनों के बाद इन धारियों से कवक के बीजाणु पाउडर के रूप में बाहर निकलना शुरू होते है। यह बीजाणु हवा का साथ पाकर रोग का प्रसार करते है। पत्तियों पर पीली धारियों के रूप में चमकीले चकते नजर आने लगते है। जिनमें से पीले रंग का कवक बिजाणु हल्दी के पाउडर की तरह निकलता है। इन लक्षणों के आधार पर किसान कृषि विशेषज्ञों से रोग नियंत्रण की सलाह पा सकते है।
यह करें उपचार
उन्होंने बताया कि पीली रोली रोग के नियंत्रण के लिए किसान लक्षण दिखाई देने पर टेबुकोनाजोल 25.90 प्रतिशत ईसी अथवा प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी एक एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पखवाड़े के अतंराल पर दो छिडक़ाव करें।
दीमक-मोयला का नियंत्रण
गेहूं-जौ की फसल में मोयला नियंत्रण के लिए डाइमिथोएट 30 ईसी 1 एमएल दवा का प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। दीमक नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 4 लीटर प्रति हैक्टयर की दर से सिंचाई पानी के साथ देवें।