सर्द हवाओं संग बढ़ी रबी बुवाई, खाद संकट बरकरार राजस्थान
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। रबी फसल की बढ़वार के साथ ही किसान निराई-गुडाई में जुट गए हैं। हालांकि, यूरिया-डीएपी की आपूर्ति समय पर नहीं होने से आदान बिक्री केन्द्रों पर किसानों की कतारे देखने को मिल रही है। उधर, मैदानी जिलों में कोहरे की शुरूआत हो चुकी है। सुबह हल्की धुंध देखी जा रही है। साथ ही, सर्दी भी चमक उठी है। दूसरी ओर प्रदेश में रबी बुवाई लक्ष्य से 78 फीसदी ज्यादा हो चुकी हैं। बुवाई आंकड़ो पर गौर करें तो इस साल एक भी फसल शत प्रतिशत के पार नहीं पहुुंच पाई है। सरसों और चना की बुवाई भी पिछड़ी हुई है। सरसों बुवाई निर्धारित लक्ष्य से 9 फीसदी कम हुई है। वहीं, चना की बुवाई भी लक्ष्य से 6 फीसदी पीछे चल रही है। गेहूं की बुवाई लक्ष्य से 71 फीसदी हो चुकी है। जबकि, जौ की बुवाई लक्ष्य से 85 फीसदी हुई है। कृषि जानकारों का कहना है कि अक्टूबर में बारिश के चलते किसान समय पर फसलों की बुवाई नहीं कर पाएं। इसका प्रभाव अब बुवाई लक्ष्य पर देखने को मिल रहा है।
अरंडी में सूरी मोल्ड
अरंड़ी फसल में सफेद मक्खी कीट का प्रकोप देखने में आया हैं। जबकि किसान फसल में काली पत्ती रोग समझकर भयभीत हो रहे है। इस कीट प्रकोप से पत्तों पर काले रंग की फ फूं द पैदा हो जाती हैं। जिसे सूरी मोल्ड कहते है। फ फंू द पनपने के कारण पत्ते काले पड़ जाते है। फसल में कीट नियंत्रण के लिए किसान ट्राइजोफॉस 2 मिली अथवा मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव कर सकते है।

खिलने लगे सरसों में फूल
अगेती बुवाई की गई सरसों की फसल में फूल खिलना शुरू हो गए है। गौरतलब है कि कृषि विभाग ने इस साल सरसों बुवाई के लिए 36 लाख हैक्टयर क्षेत्र का लक्ष्य तय किया था। इसकी बुवाई लक्ष्य से 91 फीसदी हो चुकी है।
छाने लगी धुंध
प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ असर के चलते पिछले दिनों कुछ जिलों में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। साथ ही, आसमान में बादल छाएं रहे। रात में कोहरा और सुबह हल्की धुंध देखी जा रही है। इसके साथ ही, सर्दी भी चमक उठी है। ठंड़ धूजणी छुड़ाने लगी है।
पश्चिम में मसाला और चना
प्रदेश के पश्चिमी जिलो में किसान मसाला फसलों की बुवाई कर रहे है। जीरा, ईसबगोल, लहसुन, मेथी की बाड़मेर, नागौर, पाली, जोधपुर जिले में अच्छी बुवाई दर्ज हुई है। जबकि, कोटा संभाग में धनिया और लहसुन की बुवाई किसान कर रहे है।
यूरिया-डीएपी की आपाधापी जारी
फसल बुवाई के साथ ही डीएपी-यूरिया की मांग अब भी बनी हुई है। हालात यह है कि उर्वरक लेने के लिए किसान बिक्री केन्द्रों पर कतार में लग रहे है। जबकि, उर्वरक की रैक प्वाइंट पर पहुंचने के साथ ही तत्काल जिलों को भेजी जा रही है। इसके बावजूद भी कई जिलों में किसानों की कतारे देखने को मिल रही है। कृषि विभाग के अनुसार 15 दिसम्बर के बाद यूरिया की मांग में कमी आने की संभावना है।
जमने लगी बर्फ
सीकर, नागौर, चूरू, झुंझुनूं, दौसा सहित कई जिलों में सुबह खेतों और वाहनों की छतों पर हल्की बर्फ जमने की स्थिति दिखाई दी। वहीं, उत्तर भारत के पहाड़ों से बर्फीली हवाओं के आने के कारण अब राज्य के कई हिस्सों में शीतलहर का प्रकोप बढऩे लगा है। ऐसे में सर्दी जोर पकडऩे लगी है। दिन के समय भी अब ठंड का एहसास होने लगा है। लोग धूप सेकते हुए अब नजर आने लगे हैं। यही वजह है कि सभी शहरों का 30 डिग्री से नीचे चल रहा है।
बुवाई एक नजर

बुवाई क्षेत्र लाख हैक्टयर में।