पाले की मार से रबी तबाह, सरसों-आलू सबसे ज्यादा प्रभावित

नई दिल्ली 22-Jan-2026 01:23 PM

पाले की मार से रबी तबाह, सरसों-आलू सबसे ज्यादा प्रभावित

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। पिछले 15 दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण चल रही शीतलहर और पाले ने आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इससे खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गई हैं। लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण किसानों को रबी की फसलें सरसों, मटर और आलू को नुकसान होने का अंदेशा है। किसानों ने बताया कि आने वाला समय रबी की फसल की कटाई का है। खेतों में सरसों, गेहूं, चना, मटर और कैश क्रॉप आलू के साथ-साथ दूसरी सब्जियों की फसलें खड़ी हैं। शीतलहर और पाले से सरसों सहित दूसरी फसलों को सबसे ज़्यादा नुकसान हो रहा है। सरसों में फंगस और तना गलन की बीमारी लग गई है। इसी तरह आलू की फसल लेट ब्लाइट और स्मॉलपॉक्स की बीमारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। किसानों ने आगे बताया कि बदलता मौसम खेती का गणित बिगाड़ रहा है। इससे उत्पादन में गिरावट का अंदेशा बना हुआ है। गौरतलब है कि प्रदेश के कई जिलों में पाला गिरने से रबी फसलों में नुकसान दर्ज हुआ है। प्रदेश के पश्चिमी जिलों में रात के पाले का आलम यह है कि फसलों पर बर्फ की परत देखने को मिल रही है। 

सक्रिय होगा नया तंत्र

आगामी दिनों में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी और पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय रहेगा। इससे कुछ स्थानों पर आंशिक बादल छाने की संभावना है। इससे न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक इजाफा हो सकता है। इसके अलावा 22 से 24 जनवरी के बीच एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

सरसों में कीट- रोग

मौसम परिवर्तन से सरसों की फसल में कीट-रोग का प्रकोप बढऩे की संभावना है। इस फसल में झुलसा, तुलासिता, सफेद रोली जैसे रोग का प्रकोप की संभावना है। एटीसी अजमेर के कृषि अनुसंधान अधिकारी (पौध व्याधि) डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि सफेद रोली, झुलसा और तुलासिता रोग नियंत्रण के लिए किसान भाई फसल के 45,  60 और 75 दिन बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 से 3 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा मैन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिडक़ाव करें। 

सरसों में एफिड का नियंत्रण

कृषि अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह ने किसानों को माहू (चेपा) से बचाव के उपाय करने के लिए कहा। इसके रोकथाम और नियंत्रण के सुझाव दिए। वर्तमान मौसम परिस्थिति में सरसों की फसल में माहू (एफिड) कीट होने की संभावना अधिक बढ जाती है। इससे फसल के उत्पाद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है और उत्पादन में कमी आती है। 

ऐसे करें नियंत्रण

 कीट का प्रकोप होने पर नीम आधारित कीटनाशक एजाडीरेक्टिन 0.03 ईसी का 2 लीटर प्रति हैक्टर छिडकाव करावे। कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर विभागीय सिफारिश अनुसार किट नाशी रसायनो का सुबह या शाम के समय छिडक़ाव करें। 

ठंड से गेहूं और चना को फायदा

तेज ठंड से गेहूं और चना फसल को फायदा होगा। कृषि विशेषज्ञों ने बताया ठंड जितनी तेज पड़ेगी, गेहूं और चना फसल उत्पादन उतना अच्छा होगा। तापमान कम होने पर सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू, बैगन और अरहर को नुकसान की आशंका है। ऐसे में सब्जी उत्पादक किसान को लगातार निगरानी की जरूरत है।


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