ऊँट शल्य चिकित्सा पर विशेषज्ञ व्याख्यान, बहुआयामी उपयोगों पर रहा फोकस
ऊँट शल्य चिकित्सा पर विशेषज्ञ व्याख्यान, बहुआयामी उपयोगों पर रहा फोकस
(सभी तस्वीरें- हलधर)स्नातकोत्तर पशुचिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईवीईआर), जयपुर में शनिवार को “ऊँट शल्य चिकित्सा - एक अवलोकन” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के पशु शल्य चिकित्सा विभाग के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सेवानिवृत्त आचार्य प्रो. टी. के. गहलोत मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
ऊँट के बहुआयामी उपयोगों पर प्रकाश
प्रो. गहलोत ने अपने व्याख्यान में ऊँट के पारंपरिक और आधुनिक उपयोगों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सहित विश्व के अनेक देशों में ऊँट का उपयोग सेना, परिवहन, दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन, दुग्ध उत्पादन तथा मनोरंजन गतिविधियों में किया जाता है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में ऊँट की उपयोगिता आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऊँट शल्य चिकित्सा में नवाचारों की दी जानकारी
प्रो. टी. के. गहलोत ने राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (राजुवास), बीकानेर द्वारा ऊँट शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए विभिन्न नवाचारों और शोध कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए शोध एवं अनुभव साझा करते हुए बताया कि ऊँट चिकित्सा विज्ञान में निरंतर अनुसंधान हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास संभव हुआ है। प्रो. गहलोत ने विभिन्न देशों में ऊँट पर चल रहे अनुसंधान कार्यों का भी उल्लेख किया और विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में शोध की संभावनाओं के प्रति प्रेरित किया।