सरसों पर प्रक्षेत्र दिवस आयोजित, कृषि सखियों ने सीखी प्राकृतिक खेती
(सभी तस्वीरें- हलधर)कृषि विज्ञान केन्द्र, कोटा द्वारा लाड़पुरा के ग्राम राजपुरा में सरसों फसल पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 50 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। केन्द्र के विषय विशेषज्ञ डॉ. मुकेश चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत राजपुरा (लाड़पुरा) और मेहंदी (दिगोद) गांवों में 50 किसानों के खेतों पर सरसों की उन्नत किस्म बीपीएम-11 के प्रदर्शन लगाए गए हैं। किसानों को उन्नत बीज के साथ सल्फर, खरपतवार नियंत्रण हेतु खरपतवारनाशी और बीज उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि यह किस्म विशेष रूप से देरी से बुवाई के लिए उपयुक्त है। 120–125 दिन में पककर अनुकूल परिस्थितियों में 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने में सक्षम है।
किसानों को खेती के लिए दी वैज्ञानिक सलाह
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम मीणा ने किसानों को प्रमाणित बीज के उपयोग, मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरक प्रयोग और उन्नत किस्मों के चयन की सलाह दी। साथ ही उन्होंने फसल उत्पादन के साथ पशुपालन अपनाकर अतिरिक्त आय स्रोत विकसित करने और समन्वित कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया। प्रक्षेत्र दिवस के दौरान किसानों ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वैज्ञानिक विधि से बुवाई करने पर यह किस्म स्थानीय किस्मों की तुलना में अधिक उपज देने वाली, सफेद रोली रोग के प्रति प्रतिरोधी, कम बढ़वार वाली और अधिक फलियां देने वाली सिद्ध हो रही है।
5 दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न
कृषि विज्ञान केन्द्र, कोटा में संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, कोटा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 17 फरवरी से 21 फरवरी 2026 तक 5 दिवसीय कृषि सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में कोटा जिले के लाड़पुरा, खेराबाद, सांगोद, सुल्तानपुर एवं इटावा ब्लॉक की 60 कृषि सखियों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. बी.एस. मीणा, डॉ. श्रवण यादव, डॉ. जे.पी. तेतरवाल, डॉ. घनश्याम मीना, डॉ. योगेन्द्र मीणा, राजवीर सिंह और नवोन्मेषी किसानों ने प्राकृतिक खेती की आवश्यकता, संभावनाएं, फसल प्रबंधन, पंजीकरण प्रक्रिया व जैविक कृषि आदानों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के लिए कृषि अनुसंधान केंद्र, उम्मेदगंज स्थित जैविक खेती इकाई और समन्वित कृषि फार्म का भ्रमण भी कराया गया। साथ ही जीवामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक खेती के आदानों को तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया।
समापन समारोह में आत्मनिर्भरता पर रहा जोर
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र सिंह ने कृषि सखियों से आग्रह किया कि वे अपने खेत में छोटे स्तर से प्राकृतिक खेती की शुरुआत करें और घर पर जैविक किचन गार्डन स्थापित करें। मुख्य अतिथि अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार अशोक कुमार शर्मा ने महिलाओं को स्वाभिमानपूर्ण जीवन जीने और परिवार में सकारात्मक वातावरण विकसित करने का संदेश दिया। विशिष्ट अतिथि अतिश कुमार ने प्राकृतिक खेती के प्रसार में कृषि सखियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।