ठंड बढ़ी और खेतों में सरसों की रौनक भी
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी हवाओं के दबाव के चलते प्रदेश में सर्दी का असर तेज हो गया है। मैदानी भागो में अलसुबह धंधु और कोहरे की चादर नजर आने लगी हैं। वहीं पारा लुढकने से माउंट आबू और फतेहपुर में बर्फ जमने के भी समाचार है। उधर, खेतों में भी पीला सोना (सरसों) यौवन पाने लगा है। अगेती सरसों दाना बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वहीं, चने में भी फलाव आना शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि रबी फसलों की बुवाई एक करोड़ 20 लाख हैक्टयर लक्ष्य की तुलना में 91 हजार हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। कृषि विभाग का कहना है कि सभी रबी फसलों का बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष से काफी बढ़ा है। ऐसे में इस साल मौसम के साथ देने पर किसानों को रबी फसलों की अच्छी उपज मिलने की उम्मीद है। गौरतलब है कि गेहूं की बुवाई 15 दिसम्बर तक किसान कर सकते हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार सर्द मौसम गेहूं और चने की फसल के लिए अच्छा है। लेकिन, मौसम में आ रहे बदलाव को देखते हुए सरसों-चना उत्पादक किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। आपको बता दें कि सरसों की बुवाई 36 लाख हैक्टयर के मुकाबले 33.69 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। बुवाई का यह आंकड़ा गत वर्ष समानावधि से अधिक है। पिछले साल समानावधि में 32.69 लाख हैक्टयर में सरसों की बुवाई हुई थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरसों बुवाई क्षेत्रफल में अब ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद नहीं है।

यह करें किसान
पछेती गेहूं की उन्नत प्रजातियों में डब्ल्यूआर 544, एचडी 3237, राज 3765, एचडी 3271, एचडी 3059, एचडी 3117, यूपी 2338, पीबीडब्ल्यू 373 और यूपी-2425 शामिल है। प्रति हैक्टयर के 125 किलोग्राम बीज की जरूरत होगी। बुवाई से पहले गेहूं के बीज को थायरम 2.0 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें। इसी तरह जिन खेतों में दीमक का प्रकोप हो वहां पर क्लोरपाईरिफास (20 ईसी) 5 लीटर प्रति हैक्टयर की दर से पलेवा के साथ या सूखे खेत में छिडक दें।
चने में उखटा
चने की फसल में उखटा और जडग़लन रोग का प्रकोप देखने को मिला है। चना फसल को जडग़लन ओर उखटा रोग से बचाने के लिए किसान 500 ग्राम कार्बेण्डाजिम 50 डब्ल्यूपी को 5-6 किग्रा रेत मिलाकर सिंचाई से पूर्व प्रति बीघा की दर से पौधे के जड़ क्षेत्र में भुरकाव करें।

गोभी फसल की करें निगरानी
इस मौसम में गोभीवर्गीय सब्जियों में पत्ती खाने वाले कीटों की रेगुलर निगरानी करते रहें। बीटी-1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा स्पेनोसेड दवा -1.0 एमएल को 3 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करें। आर्द्रता अधिक रहने की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए किसानों को सलाह है कि वह गेंदे की फसल में पुष्प सडन रोग के आक्रमण की निगरानी करते रहें।
इस सप्ताह से कड़ाके की ठंड
मौसम केन्द्र जयपुर की माने तो आने वाले दिनों में मौसम साफ और शुष्क रहेगा। कोहरे और शीतलहर का असर दिन-प्रतिदिन बढता जाएगा। वहीं जल्द ही कडाके की ठंड शुरू होने के पूरे आसार है। सुबह के समय घना कोहरा भी छाया रहेगा। शेखावटी इलाका सबसे ठंडा रहेगा और लूणकणसर, चुरू, सीकर जैसे शहरों में पारा तेजी से नीचे लुढक़ेगा। बारिश की संभावना नहीं है। लेकिन, सुबह शाम की शीतलहर लोगों को तड़पाने के लिए काफी हैं। अगले सप्ताह उत्तरी राजस्थान में न्यूनतम तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, शेखावाटी, सीकर, झुंझुनू और चूरू में तापमान 3-5 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। कई क्षेत्रों में शीतलहर की स्थिति भी रहेगी। दिन में हल्की धूप से राहत मिल सकती है, लेकिन सुबह और रात की ठंड बेहद तीखी रहेगी।
91 फीसदी बुवाई सम्पन्न
रबी फसल की बुवाई एक करोड़ 20 हजार हैक्टयर लक्ष्य के मुकाबले 1 करोड़ 8 लाख हैक्टयर में हो चुकी हैं। जो लक्ष्य का 91 फीसदी हैं। अब बुवाई में बढ़ोत्तरी की संभावना गेहूं से हैं। दूसरी फसल का बुवाई समय निकल चुका हैं। गौरतलब है कि इस साल जौ की बुवाई लक्ष्य से 8 फीसदी ज्यादा हुई है।

बुवाई क्षेत्र लाख हैक्टयर में।