अजैविक दबाव दूर करने में बायो टेक्नोलॉजी कारगर
(सभी तस्वीरें- हलधर)भरतपुर। सरसों अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. वीवी. सिंह ने राई-सरसों में जैविक-अजैविक दबाव को कम करने के लिए जैव-प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर दिया। वे, दस दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र में बोल रहे थे। डॉ. सिंह ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में फसल सुधार के लिए उन्नत आणविक तकनीकों का उपयोग अनिवार्य हो गया है। प्रशिक्षण में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नवीन सिंह ने राई-सरसों में आनुवंशिक विविधता बढ़ाने के लिए वाइड-हाइब्रिडाइजेशन तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नवीन चन्द्र बिष्ट ने सरसों की पोषण गुणवत्ता सुधार में जीन-एडिटिंग तकनीक की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रभु दयाल मीना ने राई-सरसों में प्रमुख रोगों की पहचान, प्रबंधन और आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेपों के महत्व पर व्यापक जानकारी दी। प्रशिक्षण में 8 राज्यो के कृषि वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
जनसेवा ही कर्मयोग
संस्थान में क्षमता निर्माण आयोग के सहयोग से दो दिवसीय कर्मयोगी जनसेवा कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।