राजस्थान का लहसुन बनेगा ग्लोबल ब्रांड, GI टैग की बड़ी पहल

नई दिल्ली 24-Jan-2026 12:25 PM

राजस्थान का लहसुन बनेगा ग्लोबल ब्रांड, GI टैग की बड़ी पहल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। सोजत मेंहदी और अश्वगंधा के जैसे ही लहसुन को वैश्चिक पहचान दिलाने के लिए जीआई टैग की कवायद शुरू हुई है। लहसुन की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव बनाकर बौद्धिक संपदा कार्यालय चेन्नई भिजवाए गए हैं। प्रस्ताव में कृषि महाविद्यालय बारां, कृषि विश्वविद्यालय कोटा और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर के सहयोग से चेन्नई के बौद्धिक संपदा कार्यालय में आर्वेदक समूह उत्पादकों के नाम से प्रस्तुत किया गया है। जो कि कृषि उत्पाद बाजार समिति बारां के नाम से पंजीकृत किया जाएगा।

हाड़ौती की नगदी फसल

गौरतलब है कि लहसुन हाड़ौती के किसानों के लिए नगदी फसल है। इस संभाग में बारां जिला लहसुन की गुणवत्ता में अलग पहचान रखता है। पिछले सालों में राज्य में लहसुन की औसत 89 हजार 805 हैक्टयर में बुवाई होकर औसत उत्पादकता 5916 किलोग्राम रही है। इसमें बारां जिले का औसत क्षेत्रफल 30 हजार 714 हैक्टयर रहा और उत्पादकता 6133 किलोग्राम रही है। 

पोटाश की मात्रा ज्यादा

पोटाश तत्व लहसुन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। लहसुन की गुणवत्ता इसकी कली में पाई जाने वाली डाई एमिल डाई सल्फाइड नामक ऑरगैनो सल्फर यौगिक के कारण होता होता है। इस प्रकार से काली मिट्टी में कम तापमान से लम्बे समय तक लहसुन की गंध बनी रहती है। ऐेसें कहा जा सकता है कि अश्वगंधा के जैसे ही लहसुन को वैश्चिक पहचान मिलने की उम्मीद है।