प्याज को लेकर फिर आंदोलन, क्या है किसानों की मांग?
(सभी तस्वीरें- हलधर)देश के प्याज उत्पादक किसानों को प्याज के गिरते दामों ने रोने पर मजबूर कर दिया है। प्याज के भाव से मध्यप्रदेश, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसान बेहद निराश हैं। सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिससे प्याज किसानों का सब्र टूटता दिख रहा है। यहां तक कि अब प्याज उत्पादक किसान एक बार फिर बड़े आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं। मध्यप्रदेश के खंडवा में रविवार को स्वंतत्र किसान जन आंदोलन के तहत हजारों किसान एकजुट हुए। ये किसान भुसावल रेलवे ट्रैक के टिगरिया में पहुंचे और ट्रैक से महज 500 मीटर की दूरी पर जमावड़ा लगाया। आंदोलनरत किसानों ने कहा कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं होती है तो हम रेल रोको आंदोलन करेंगे। यहां मौके पर क्षेत्रीय सांसद सहित दो विधायकों को भी बुलाया गया और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम सांसद को ज्ञापन भी दिया गया। प्याज उत्पादक किसानों ने ज्ञापन में प्याज के निर्यात को शुरू करने, महाराष्ट्र की तरह पर प्रति एकड़ 24 रुपए किलो पर खरीदने, सोयाबीन की फसल के लिए मुआवजा, मक्का का उचित दाम और कपास को CCI द्वारा खरीदने की मांग की है।
केंद्रीय कृषि मंत्री से बात करने पर अड़े किसान
आंदोलन कर रहे प्याज उत्पादक किसानों ने एक और विकल्प सुझाते हुए सरकार से 50 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से फसल खराबा मुआवजा देने की बात कही है। सोयाबीन की राहत राशि भी सभी किसानों को एक साथ दिए जाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा मक्का की उचित दामों पर खरीद की जाए। किसानों ने कहा कि उनकी मांग केंद्र स्तर की है और जब तक उनकी बात केंद्रीय कृषि मंत्री से नहीं होती, तब तक वह ट्रैक के पास से नहीं हटेंगे। यहां किसानों को मनाने आए क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने किसानों की प्रदेश के कृषि मंत्री इंदल सिंह कंसाना से फोन पर बात भी कराई। लेकिन विरोध कर रहे किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बात करने पर अड़ गए। इस दौरान सांसद ने कहा कि कृषि मंत्री कार्यक्रम में व्यस्त हैं और अभी उनसे बात नहीं हो सकती है। इस पर किसानों ने सांसद को दो घंटे का समय दिया। साथ ही कहा कि अगर बात नहीं हुई और केंद्रीय मंत्री से कोई भरोसा नहीं मिला, तो वह पटरियों पर बैठ जाएंगे और रेलवे लाइन जाम कर देंगे।
सांसद ने किसान हितैषी कार्य गिनाए तो नाराज हुए किसान
प्याज उत्पादक किसान जब आंदोलन के उतरे तो मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, खण्डवा विधायक कंचन तनवे और पंधाना विधायक छाया मोरे उनसे बात करने के लिए मौके पर पहुंचे। इस बीच जब सांसद पाटिल ने भाजपा सरकार के किसान हितैषी कार्यो को गिनाना शुरू किया तो किसान और नाराज हो गए। किसानों ने नेताओं से साफ कहा कि उनकी फसल का उचित मूल्य मिलना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वो बड़े आंदोलन के लिए तैयार हैं। जब सांसद पाटिल ने प्रदेश के कृषि मंत्री इंदल सिंह कसाना से बात करानी चाही तो किसान नेताओं ने दो टूक कह दिया कि प्याज के निर्यात का विषय केंद्रीय कृषि मंत्री का है, वे बात करके समाधान निकालेंगे तो ही किसान मानेंगे। इधर, सांसद का कहना है कि वे किसानों के साथ हैं, लेकिन कोई भी निर्णय एकदम से संभव नहीं है।
ये बोले किसान नेता पटेल
आंदोलनरत किसानों के नेता सुभाष पटेल का कहना है कि किसानों को सोयाबीन फसल की राहत राशि अभी तक नहीं मिली है, प्याज की फसल का मंडी में कोई भाव नहीं है। प्याज उखाड़कर खेत से मंडी ले जाते है तो पैसे जेब से लग लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहरी सरकार को सुनाने के लिए आज यहां हजारों किसान एकत्र हुए है। हमारी मांग है कि या तो सरकार निर्यात खोले या फिर 24 रुपये किलो के भाव से प्याज की किसानों से खरीद करें। पटेल ने आगे कहा, 'किसान शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे है और अगर फिर भी केंद्र सरकार तक हमारी बात नहीं पहुंची, तो फिर हम रेलवे ट्रैक पर आंदोलन शुरू कर देंगे। किसान अपनी लड़ाई लड़ने को स्वतंत्र हैं।' किसान नेता पटेल ने बताया कि उनकी बात राज्य कृषि मंत्री कंसाना जी से करवाई गई है और उन्होंने खंडवा आने का भरोसा दिया है।