किसानों का आंदोलन हुआ हिंसक, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली 14-Nov-2025 01:22 PM

किसानों का आंदोलन हुआ हिंसक, जानिए क्या है पूरा मामला

(सभी तस्वीरें- हलधर)

देश के कई राज्यों में किसान अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर आंदोलनरत है। किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिए जाने से उनकी नाराजगी अब टकराव-हिंसा में बदल रही है। कर्नाटक के मुधोल में गुरुवार को गन्ना किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया। मुधोल, बागलकोट और विजयपुरा जिलों के अन्य हिस्सों में किसान का उग्र हो गए और तोड़-फोड़ कर दी। यहां गन्ना किसान पिछले कुछ समय से 3,500 रुपये प्रति टन के 'उचित मूल्य' (एफआरपी) की मांग कर रहे थे। उनकी मांगों की सुनवाई नहीं होने से नाराज को होकर किसानों ने एक फैक्टरी यार्ड में खड़े कम से कम 15 गन्ना ट्रैक्टरों में आग लगा दी, जिससे गन्ना किसानों का आंदोलन हिंसक हो गया। वहीं, उधर बेलगावी के किसानों ने पिछले हफ्ते राज्य सरकार की ओर से घोषित 3,300 रुपये प्रति टन के गन्ना मूल्य फॉर्मूले को मंजूर कर लिया। लेकिन, विजयपुरा और बागलकोट में गन्ना किसान अपनी मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। 

सरकारी फॉर्मूला पूरी तरह से अवैज्ञानिक: किसान

जानकारी के अनुसार, कर्नाटक में बेलाकोट जिले के महालिंगपुर और समीरवाड़ी में आंदोलन उस समय और तेज हो गया, जब कुछ रिपोट्स  में दावा किया गया कि गन्ना मूल्य निर्धारण को लेकर अनसुलझे मुद्दों के बीच एक फैक्टरी ने काम करना शुरू कर दिया है। इसको लेकर किसानों में फिर से नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद किसानों ने समीरवाड़ी स्थित गोदावरी फैक्टरी को घेर लिया, जहां गन्ने से लदे ट्रैक्टरों में आग लगा दी गई। इसके अलावा महालिंगापुर के संगनट्टी क्रॉस से भी आगजनी ख़बरें हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी फॉर्मूला पूरी तरह से'अवैज्ञानिक' है, क्योंकि रिकवरी (गन्ना पेराई के बाद चीनी निकलना) कीमतें तय करने का कोई सही पैमाना नहीं है। वहीं, एक किसान नेता ने आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को बदनाम करने के लिए उपद्रवियों ने हिंसा फैलाई। हिंसक आंदोलन के बीच बागलकोट के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक ने किसानों से शांति की अपील की। साथ ही बातचीत का रास्ता अपनाकर हल निकालने का भरोसा दिलाया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।

किसानों ने कई जगह सड़कें और हाइवे किए जाम 

अपनी मांगों को लेकर नाराज गन्ना किसानों ने जामखंडी के सिद्धपुर के पास हुबली-सोलापुर हाईवे को जाम कर दिया, जिसकी वजह से यहां यातायात बाधित हो गया। वहीं, हुन्नूर और हुल्याल गांवों में भी सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गईं। गौरतलब है कि बागलकोट के गन्ना किसान इससे पहले भी कर्नाटक सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य फॉर्मूले से सहमत नहीं थे। किसान चाहते हैं कि चीनी मिलें आपसी सहमति से मूल्य तय करें और तय समय पर भुगतान करें। एक ओर जहां कर्नाटक में गन्ना किसानों का मुद्दा लगातार गर्म हो रहा है, क्योंकि वे सरकार से अधिक एफआरपी की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, प्रदेश की सिद्धारमैया सरकार का कहना है कि एफआरपी का मुद्दा केंद्र के पास है और उसे ही इसका अधिकार है। कर्नाटक और केंद्र के बीच बढ़ते इस विवाद में राज्य के गन्ना उत्पादक किसान भी परेशान हो रहे हैं। ज्ञात रहे कि बेलगावी में 29, बागलकोट में 14 और विजयपुरा में 10 गन्ना पेराई की फैक्ट्रियां हैं।

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