खेतों में नजर आने लगा उम्मीदों का उजास

नई दिल्ली 31-Oct-2025 01:58 PM

खेतों में नजर आने लगा उम्मीदों का उजास

(सभी तस्वीरें- हलधर)

5 लाख हैक्टयर में सरसों की बुवाई

दीपावली हो और खेत रोशन नहीं हो, ऐसा संभव नहीं है। दीपों की लडिय़ां इन दिनों खेतों में भी उम्मीदों का हरा उजास भर रही है। धन-धान्य की कामना को लेकर किसान खेतों में दीप प्रज्जवलित कर रहे है। साथ ही, फसल बुवाई कार्य में भी जुटे हुए है। गौरतलब है कि गुनगुनी सर्दी के बीच रबी फसलों की बुवाई में बढौत्तरी दर्ज हो रही है। वहीं, खेतों में अगेता पीला सोना (सरसों) दो से चार पत्ती होने लगा है। गौरतलब है कि रबी बुवाई के लिए एक करोड़ 20 हजार हैक्टयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (सांख्यिकी) टीसी गुप्ता ने बताया कि सभी रबी फसलों का बुवाई क्षेत्र बढ़ रहा है। किसानों ने मसाला और गेहूं फसल बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी है। गौरतलब है कि दिवाली बाद से प्रदेश में गेहूं-जौ की बुवाई शुरू हो जायेगी। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मौसम के बदलाव को देखते हुए सरसों-चना उत्पादक किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। क्योंकि, दिन में तेज गर्मी पड़ रही है। वहीं, रात ठंड़ी हो रही है। इस कारण फसल की शुरूआती अवस्था में कीट प्रकोप देखने को मिल सकता है। गौरतलब है कि  प्रदेश में सितम्बर-अक्टूबर माह में हुई बारिश के चलते इस वर्ष बारानी क्षेत्रों में चने की रिकॉर्ड बुवाई होने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ बारिश को रबी फसलों के मुफीद बता रहे है।

पेंटेड बग, आरामक्खी का नियंत्रण ऐसे

हालांकि, अभी किसी भी जिलें से सरसों की फसल में पेन्टेड़ बग और आरामक्खी प्रकोप के समाचार नहीं है। लेकिन, किसान दोनों कीटों को लेकर सतर्क रहे। यह कीट नवांकुरित पौधें को चट करते है। सरसों की 8 से 12 दिन की अवस्था पर यह कीट पत्तियों का रस चूस कर फसल को पूर्णत नष्ट करने की क्षमता रखता है अत: प्रारंभिक अवस्था में फसल की निगरानी रखना अति आवश्यक है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कीट नियंत्रण के लिए शाम के क्यूनॉलफॉस पाउडर 1.5 प्रतिशत 6 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करें। इसके पश्चात सरसों के 25 से 30 दिन की अवस्था पर आरा मक्खी नामक पत्तियों पर एक कीट दिखाई देगा जो पत्तियों की सतह को खाकर केवल डंठल छोड़ देती है।

दे रहे हैं तकनीकी जानकारी

रबी की फसलों में गेहूं, जीरा, जौ, चना, तारामीरा और इसबगोल सहित दूसरे छोटे-मोटे अनाज की बुवाई की जाती है। राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र, अजमेर के अधिकारी किसान को जीरा, सौंफ, मैथी, अजवायन बुवाई की उन्नत शस्य क्रिया बता रहे हैं। उन्नत किस्म के बीज का उपयोग करने, बीजोपचार बाद बुवाई करने, गुणवत्तायुक्त कीटनाशक और फफूंदनाशक दवा के उपयोग की जानकारी किसान को दी जा रही है। गौरतलब है कि पश्चिमी राजस्थान में जीरा, ईसबगोल, सौंफ की बुवाई किसान कर रहे है। वहीं, हाड़ौती संभाग में धनिया और लहसुन की बुवाई शुरू हो चुकी है। 

रबी बुवाई 5 लाख

रबी फसल की बुवाई लक्ष्य से 5 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। मौसम अनुकूल रहने से इस बार चने की बुवाई भी सरसों के साथ ही शुरू हो गई थी। इस कारण बुवाई क्षेत्र अच्छी प्रगति दिखा रहा है। सरसों की बुवाई 5 लाख हैक्टयर और चना की बुवाई 29 हजार हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। जबकि, जौ की बुवाई अभ दर्ज नहीं हुई है।

पशुओं को ऐसे बचाएं सर्दी से

पशु वैज्ञानिक डॉ. सीएम यादव ने बताया कि पशुपालकों को पशुओं के लिए अपने घर के आस-पास ओट में एक कच्चा/पक्का पशु आवास बनाना चाहिए। जो कि हवा के रूख के विपरीत हो, आवास को साफ-सुथरा, सूखा रखें। पशुओं को ठण्ड से बचाव के लिए उनके ऊपर बारदाना, बोरी गर्म कम्बल डालकर ओढ़ाकर रखें। ऊंटों -घोड़ों पर झूल डालें, छोटे पालतु बछड़ों को गर्म कपड़े पहना कर ठण्ड से बचाए। पशुओं को खुले में ना छोड़े। पशुओं को संतुलित आहार दिया जाए। जिसमें दाना, गुड़ खल की उचित मात्रा शामिल हो। इन दिनों प्रसव का समय भी होने के कारण ब्याने के बाद पशुओं के बच्चों का  विशेष ध्यान रखा जाए। मां बच्चे को उचित आवास/ आहार प्रदान करें। पशु के बीमार होने पर पशु चिकित्सक से इलाज करवाएं।

शुष्क रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने मौसम का हाल बताते हुए कहा है कि किसी भी जिले में बारिश नहीं होने की आशंका है। प्रदेश के ज्यादातर जिलों में मौसम शुष्क रहेगा। वहीं, अब प्रदेश में सुबह-शाम की हल्की सर्दी महसूस होने लगी है। आगामी दिनों में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस महीने के अंत के हफ्ते में पारे में और गिरावट दर्ज की जा सकती है। साथ ही, ठंडी हवाएं भी चल सकती हैं। फिलहाल बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।

 

एसएसपी का उपयोग करें किसान

कृषि विभाग के द्वारा किसानों को तिलहन- दलहनी फसलों में तेल और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने केलिए सल्फर युक्त उर्वरक सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग की सलाह दी जा रही है। इस उर्वरक के प्रयोग से फसलों को फास्फोरस के साथ-साथ सल्फर और कैल्शियम तत्व भी प्राप्त होते हैं, जिससे मिट्टी की संरचना में सुधार होता है। गौरतलब है कि डीएपी उर्वरक के प्रत्येक बैग में 23 किलोग्राम फास्फोरस और 9 किलोग्राम नाइट्रोजन पाया जाता है। जबकि, एसएसपी के प्रति बैग में 8 किलोग्राम फास्फोरस और 5.5 किलोग्राम सल्फर पाया जाता है। यदि किसान डीएपी के स्थान पर 3 बैग एसएसपी और एक बैग यूरिया का उपयोग करें, तो इससे नाइट्रोजन और फास्फोरस की पर्याप्त पूर्ति कम लागत पर हो सकती है, साथ ही मिट्टी को अतिरिक्त पोषक तत्व — सल्फर और कैल्शियम भी मिलते हैं।


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