किसानों ने कपास बुवाई की शुरू की तैयारी

नई दिल्ली 20-Apr-2026 06:36 PM

किसानों ने कपास बुवाई की शुरू की तैयारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश के बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जोधपुर आदि जिलों में  किसानों ने बीटी कपास बुवाई के लिए जमीन को हांक-जोत कर तैयार करना शुरू कर दिया है। पिछले साल गुलाबी सुंड़ी का प्रकोप कम रहने के चलते इस साल कपास बुवाई का रकबा बढ़ जाने की उम्मीद है। क्योंकि गत वर्ष किसानों ने फसल खराब होने के डर से बीटी कपास की बुवाई से हाथ खींच लिया था। इससे कपास का रकबा 7 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है। हालांकि, कृषि विभाग ने ना तो बीटी बीज प्रदाता कंपनियों को बीज बिक्री की अनुमति जारी की है और ना ही कपास बुवाई का लक्ष्य तय किया है। संभवत: चालू सप्ताह में कार्यालय खुलने के साथ ही बीटी बीज बिक्री की अनुमति विभाग के द्वारा जारी की जा सकती है। उधर, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते खेत की हकाई जुताई करने से कीट-रोग में कमी आती है। साथ ही, फसल की बुवाई समय पर संभव होती है। जानकारी के अनुसार देसी और अमेरिकन कपास किस्मों की बुवाई मध्य अप्रैल से श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में शुरू हो जाती है। हालांकि, इस साल नहरबंदी के चलते बुवाई कार्य थोड़ा आगे खिसक सकता है। बता दें कि किसान बीटी कपास की बुवाई 20 मई तक करते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कपास की बुवाई के बाद मानसून की प्रथम वर्षा के साथ ही किसान बाजरा, तिल, ग्वार, मूंगफली आदि खरीफ फसलों की बुवाई करना शुरू कर देते है। ताकि, फसल समय पर पककर तैयार हो जाये। इसी को देखते हुए खरीफ सीजन की बीज और उर्वरक मांग का आकलन किया जा रहा है। 

जुताई से कीट-रोग का नियंत्रण

एआरएस श्रीगंगानगर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. लोकेश कुमार जैन ने बताया कि 10-15 दिन पहले खेत की जुताई करना किसानों के लिए लाभदायक है। क्योंकि तेज गर्मी से रोग और कीट के जीवाणु खत्म हो जाते हैं। बता दें कि कपास की फसल में उखटा, मूलग्रंथी रोग, शकाणु झुलसा, पत्ती धब्बा रोग का उपचार बुवाई पूर्व प्रबंधन से भी संभव है। 

यह करें किसान

जड़गलन की रोकथाम के लिए किसान मई के प्रथम पखवाड़े में बुवाई करें। बीजोपचार के लिए ब्रासीकॉल 5 ग्राम प्रति कि ग्रा बीज अथवा कार्बेण्डाजिम 2 ग्राम प्रतिकिग्रा बीज दर से उपयोग करे। उन्होंने बताया कि कपास के खेत में मोठ की बुवाई से रोग का प्रकोप कम होता है। 

ऐसे उपयोग करें उर्वरक

उन्होंने बताया कि बिजाई से पूर्व बीटी कपास उत्पादक किसान प्रति बीघा 25.5 क्विंटल गोबर की खाद, 20 किलो यूरिया, 20 किलो एमओपी 60 प्रतिशत, 4 किलो जिंक सल्फेट 33 प्रतिशत और 62 किलो एसएसपी अंतिम जुताई के समय छिडक़ कर देंवे। 

ऐसे बढ़ाएं उत्पादन

बीटी कपास फसल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को पोषक तत्व प्रबंधन पर फोकस करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि बीटी कपास से औसतन 8-10 क्विंटल प्रति बीघा की उपज ली जा सकती है। लेकिन, जिले की उत्पादकता इससे काफी कम है। उत्पादकता कम आने का मुख्य कारण किसानों के द्वारा सिफारिशानुसार पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं करना है। उन्होंने कहा कि डीएपी, पोटाश और यूरिया के उपयोग से फसल की उत्पादकता में बढ़ोतरी संभव नहीं है। क्योंकि, खेतों में जैविक कार्बन की उपलब्धता कम है। इसके कारण उर्वरक उपयोग का फायदा किसान को नहीं मिलता है। गौरतलब है कि हनुमानगढ़ जिले में जैविक कार्बन 0.75 की जगह महज 0.30 फीसदी है। ऐसे में किसानों को भूमि में जैविक कार्बन का अंश बढ़ाने के लिए सड़ी गली गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद, सिटी कम्पोस्ट, हरी खाद का उपयोग करना जरूरी है। 

एमआरपी तय नहीं

सरकार ने अब तक बीटी कपास पैकेट की बिक्री दर को लेकर अधिसूचना जारी नहीं की है। सूत्रों ने बताया कि जल्द ही चालू वित्तीय वर्ष के लिए दर का निर्धारण हो सकता है। संभवत: दर निर्धारण के साथ ही बीज प्रदाता कंपनियों को बीज बिक्री की अनुमति कृषि आयुक्तालय के द्वारा जारी की जा सकती है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष बीटी कपास बीज पैकेट की अधिकतम कीमत बीज-1 की 635 रुपए और बीजी-2 की 901 रुपए निर्धारित की है। 


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