इंदिरा गांधी नहर में आया पानी, 2 करोड़ की आबादी को मिलेगा भरपूर पेयजल

नई दिल्ली 18-May-2026 04:02 PM

इंदिरा गांधी नहर में आया पानी, 2 करोड़ की आबादी को मिलेगा भरपूर पेयजल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पश्चिमी राजस्थान के करोड़ों लोगों और किसानों के लिए मई की इस भीषण गर्मी में एक बहुत बड़ी राहत की खबर आई है। डेढ़ महीने (लगभग 45 दिन) से जारी इंदिरा गांधी नहर परियोजना की नहरबंदी आखिरकार समाप्त हो गई है। पंजाब के हरिके बैराज से छोड़ा गया पानी मसीतांवाली हैड (हनुमानगढ़) पहुंच चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस जल आवक से प्रदेश के 12 जिलों के लगभग 2 करोड़ लोगों को गंभीर पेयजल संकट से निजात मिलेगी।

राहत और रफ्तार

मसीतांवाली हैड पर शनिवार शाम को मसीतांवाली हैड पर करीब 2,000 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था, जिसकी मात्रा अब लगातार बढ़ाई जा रही है। हरिके बैराज से करीब 10,800 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है।

26 मई तक पहली प्राथमिकता 'पेयजल

जल संसाधन विभाग के अनुसार, वर्तमान में सबसे पहली प्राथमिकता पेयजल संकट को दूर करना है। सभी जिलों के प्रमुख जलाशयों और डिग्गियों को पहले भरा जाएगा। पहली बारी का पानी 26 मई तक प्रवाहित किया जाना तय हुआ है।

इन जिलों की बुझेगी प्यास

इस अमृत जल से हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, जोधपुर, फलौदी, जैसलमेर और बाड़मेर सहित कुल 12 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति सुचारू होगी।

अगले 48 घंटों में 'टेल' तक पहुंचेगा पानी

अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार रात से मंगलवार तक पानी बीकानेर और उसके आगे के क्षेत्रों में पहुंच जाएगा। अगले 48 घंटों में पानी के अंतिम छोर (टेल क्षेत्र) तक पहुंचने की उम्मीद है।

किसानों के चेहरे खिले: खरीफ फसलों को मिलेगा जीवनदान

डेढ़ महीने की इस नहरबंदी के दौरान नहर की सिल्ट (मिट्टी) सफाई, टूटी पटड़ियों की मरम्मत और रेगुलेटरों के रखरखाव का काम युद्धस्तर पर पूरा किया गया।

अब पानी की वापसी से पश्चिमी राजस्थान के कृषि क्षेत्र में भी नई जान आ गई है। सूरतगढ़, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ सहित विस्तृत कमांड एरिया के किसान अब नरमा (कपास), ग्वार और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। जलाशयों के भरने के बाद सिंचाई के पानी के लिए विभाग द्वारा अलग से रेगुलेशन जारी किया जाएगा।

जल संसाधन विभाग का बयान

शुरुआत में पानी की मात्रा कम होने से रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब पंजाब से डिस्चार्ज बढ़ा दिया गया है। आवश्यकता के अनुसार नहरों के गेट खोलकर पानी को आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि टेल तक जल्द से जल्द जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके।


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