बारिश-ओलावृष्टि अलर्ट: पकती फसल पर मौसम की मार

नई दिल्ली 02-Feb-2026 05:02 PM

बारिश-ओलावृष्टि अलर्ट: पकती फसल पर मौसम की मार

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। खेतों में निवाला पकने के कगार पर है और मौसम किसानों के साथ दगा करने पर तुला है। इससे रबी फसलों में खराबे की आंशका तेज हो गई है। बता दें कि पिछले दिनों आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से सरसों, चना, ईसबगोल और जीरा फसल में खासा नुकसान दर्ज हुआ है।  वहीं, सब्जी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। इस बीच मौसम में आ रहे बदलाव ने किसानों को चिंता में डाला हुआ है। उधर, मौसम विभाग ने भी नए पश्चिमी विभोक्ष के चलते जोधपुर संभाग को छोडक़र शेष सभी संभाग में मध्यम वर्षा की संभावना जताई है। ऐसे में रबी फसलों में खराबा बढने का डर है। गौरतलब है कि सर्द मौसम जहां लोगों को कंपकंपा रहा हैं, वहीं गेहूं की फसल के लिए रामबाण साबित हो रहा हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सर्द हवा से गेहूं के पौधों में फुटान ज्यादा होगा और पैदावार बढ़ेगी। बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र , भीलवाड़ा के कृषि विशेषज्ञ डॉ. केसी नागर ने बताया कि सर्द हवा से गेहूं के पौधों में फुटाव के लिए अच्छी साबित होगी। गेहूं पौधों के अंदर टिलरिंग ज्यादा होगी। जिससे हर टिल्लर पर एक समान बाली निकलेगी। जितने बाल निकलेंगे उतनी ही ज्यादा पैदावार होगी। यह मौसम फिलहाल गेहूं के लिए बहुत अच्छा है। 

बढ़ जाएगा पकाव समय 

धुंध, ठंड, कोहरा, ओस के साथ रबी फसलों को वायुमंडल में जमी प्राकृतिक नाइट्रोजन किसानों की फसलों को यूरिया खाद के रूप में मिल रही है। कोहरा, ठंड, धुंध समय पर गिरने से फसलों को 5 से 20 फीसदी यूरिया खाद मिलता है। इससे फसलों में ग्रोथ होने के साथ ही रोगों से निजात भी मिलती है। ओस के रूप में होने वाली बरसात में किसान गेहूं, जौ, चने की फसलों में यूरिया देते हैं।

झुलसा से बचाव की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने जीरा फसल को झुलसा रोग से बचाने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. तख्तसिंह राजपुरोहित ने बताया कि मौसम बदलने पर जीरा को झुलसा रोग से बचाने के लिए किसान 2 ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से मैन्कोजेब का छिडक़ाव करे। क्योंकि, नमी बढऩे से फसल में रोग प्रकोप की संभावना है।  

गेहूं में पीली रोग की संभावना

राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा के गेहूं अनुसंधान परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप सिंह शेखावत ने मौसम आए बदलाव को देखते हुए किसानों को सलाह जारी की है। उन्होंने बताया कि इस मौसमी दशा में गेहूं फसल में पीली रोग का प्रकोप होने की संभावना रहती है। इस रोग के नियंत्रण के लिए किसान टेबुकोनाजोल 25.90 प्रतिशत ईसी अथवा प्रोपीकोनाजोल 25 प्रतिशत ईसी एक एमएल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर पखवाड़े के अतंराल पर दो छिडक़ाव करें।

बिगड़ा रहेगा मौसम 

मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए फिलहाल तेज सर्दी से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग के अनुसार आज से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की अनुमान है। इसके चलते 3 और 4 फरवरी को कोटा, जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इसके उलट पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश इलाकों में मौसम मुख्यत: शुष्क रहने की संभावना है। 


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