राजस्थान में मानसून लेट, किसानों के लिए बड़ी चेतावनी जारी

नई दिल्ली 15-Jun-2026 02:14 PM

राजस्थान में मानसून लेट, किसानों के लिए बड़ी चेतावनी जारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। खेतों में बहार के लिए अभी प्रदेशवासियों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि, प्रदेश में अभी प्री-मानसून की बरसात का दौर शुरू नहीं हुआ है। पिछले दिनों से जारी बारिश पश्चिमी विभोक्ष का प्रभाव है। जो आगामी दिनो में भी बना रह सकता है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश के अधिकांश संभागों में आगामी दो तीन दिन आंधी और हल्की बारिश का दौर बना रहेगा। उधर, आईएमडी ने कहा है कि आगामी तीन-चार दिन में मानसून छत्तीसगढ़ में प्रवेश कर जायेगा। हालांकि, मानसून की चाल में सुस्ती नजर आने लगी है। लेकिन, बेहत्तर बारिश की उम्मीद फिलहाल कायम है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक मानूसन 30 जून के बाद ही राजस्थान में प्रवेश करेगा। गौरतलब है कि कई जिलों में मानसून शॉवर की अच्छी बरसात देखने को मिली है। इससे खेतों की मिट्टी नरम पड़ी है। लेकिन, इस बारिश से खेतो में खरपतवार बढने और भूमिजनित रोगाणुओं के बढने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि कोटा, बीकानेर और उदयपुर संभाग मे धान उत्पादक किसान नर्सरी तैयार करने के बाद अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे है। वहीं, सोयाबीन उत्पादक किसान भी बीज की खरीफ फरोख्त के बाद अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे है। 

18 तक आंधी-बारिश का अलर्ट
राजस्थान में आंधी-बारिश का दौर जारी रहने से तापमान मेंं कमी आई है। इससे तेज गर्मी से थोड़ी राहत मिली है। लेकिन, पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होने के साथ ही पारा फिर से चढने लगेगा। मौसम विभाग ने 15 जून तक जयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा, बीकानेर, और जोधपुर संभागों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं 16 से 18 जून तक सिर्फ जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के कई जिलों में कहीं-कहीं हल्की बारिश होने और आंधी चलने की संभावना जताई है। मौसम विभाग ने 15 जून को श्रीगंगानगर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर, उदयपुर, टोंक, सीकर, सलूंबर, राजसमंद, प्रतापगढ, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डूंगरपुर, चित्तौडग़ढ़, बूंदी, भीलवाड़ा, ब्यावर, बारां, बांसवाड़ा और अजमेर में मेघगर्जन, वज्रपात, 40-50 किमी प्रति घंटा की स्पीड से तेज हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया है।

मानसून की स्थिति 
देशभर में मानसून की गतिविधियां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही हैं. हालांकि इस बार पूर्वी और पश्चिमी तट पर मानसून की रफ्तार कुछ समय के लिए थमी हुई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ और जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले 2 से 3 दिनों में परिस्थितियां अनुकूल होने पर मानसून महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के शेष हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके साथ ही ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में भी दस्तक देने की संभावना है। 

किसानों के लिए सलाह
मौसम की इस अनिश्चितता और आंधी-बारिश की आशंका को देखते हुए मौसम केंद्र जयपुर ने किसानों और व्यापारियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है । खुले आसमान के नीचे पक कर तैयार खड़ी फसलों, कृषि मंडियों और अनाज मंडियों में खुले में रखे हुए अनाज को तिरपाल अथवा सुरक्षित शेड से अच्छी तरह ढककर रखने की सलाह दी गई है। ताकि, अनाजों को भीगने और खराब होने से बचाया जा सके

4 लाख हैक्टयर में कपास
प्रदेश में कपास की बुवाई 4 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में कपास की बुवाई ज्यादा हुई है। जबकि, जोधपुर, पाली, नागौर, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, उदयपुर, अलवर, भरतपुर, अजमेर सहित दूसरे जिलों में किसान कपास की बुवाई कम की है। वहीं, बीकानेर और जयपुर जिले में मूंगफ ली की फसल अंकुरित होना शुरू हो गई है। 

खेत तैयारी में जुटे किसान
तापमान में गिरावट आने से मौसम में थोड़ी ठंडक आ गई है। किसान सुबह और शाम खेत में जाकर खरीफ फसल की तैयारी कर रहे है। किसान चाह रहे है कि मानसून आने के पूर्व जरूरी कामों को निपटा लिया जाए। गौरतलब है कि किसानों ने ट्रैक्टर, हल के माध्यम से खेतों की जुताई करना शुरू कर दिया है। खेतों में गोबर खाद पहुंचाने और खरपतवारों को हटाने का काम शुरू हो गया है। 

यह करें किसान
बाजरा और मूंगफली की बुवाई करने वाले किसानों को फसल बुवाई में सावधानी बरतने की जरूरत है। असिंचित क्षेत्र के किसान अभी इन फसलों की बुवाई से बचें। क्योंकि, बीज अंकुरण प्रभावित हो सकता है। मंूगफली की बुवाई करने वाले किसान बुवाई पूर्व सफेद लट का उपचार जरूर करे। क्योंकि, खड़ी फसल में सफेद लट के नुकसान को रोकने में काफी दिक्कत आती है। मंूगफली बुवाई पूर्व किसान क्यूनालफॉस 5 प्रतिशत कण अथवा कार्बोफ्यूरॉन 3 प्रतिशत कण 25 किलोग्राम प्रति हैक्टयर की दर से काम लेंवे। सफेद लट परपोषी वृक्षों पर क्यूनॉलफास 25 ईसी 36 मिली अथवा कार्बोरिल 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 72 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। 


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