लाख खर्च पर दशक से मिलेगा चारा
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। काजरी ने अपने शोध से पश्चिमी राजस्थान के किसानों की बड़ी समस्या को हल कर दिया है। किसान एक लाख निवेश पर दशक तक चारे की पैदावार ले सकेंगे। अब सोच रहे होंगे, ऐसी कौनसी चारा फसल है जो दशक तक उत्पादन देती है। दरअसल, यहां हम बात कर रहे है बिना कांटो वाले कैक्टस की। जिसे काजरी के वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से शुष्क और अद्र्धशुष्क क्षेत्र के किसानों के लिए तैयार किया है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरएन कुमावत ने बताया कि कैक्टस चारे में लवण और प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। साथ ही, इसमें शुष्क पदार्थ 8-10 फीसदी के करीब पाया है। गौरतलब है कि कैक्टस को जिंदा रहने के लिए बहुत कम पानी की जरूरत होती है। साथ ही, इससे पशुओं के लिए साल भर हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है। उल्लेखनीय है कि एक पशु को दिन भर में 10 किलो चारे की जरूरत होती है। लेकिन, कैक्टस के 4 किलो चारा देने से ही पशु का पेट भर जाता है।
यह है खेती का गणित
उन्होंने बताया कि बिना कांटे वाले कैक्टस का एक तना मात्र 10 रुपये का है। एक हैक्टयर में 2 गुना 1 आकार पर 5 हजार और 1 गुना 1 आकार पर करीब 10 हजार पौधे लगाए जाते हैं। एक हैक्टयर क्षेत्र में पौधरोपण सामग्री सहित एक लाख रूपए का खर्च आता है। लगाने के बाद हर दो महीने में फसल तैयार हो जाती है। वर्तमान में कैक्टस के फल और पत्ते 17 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं। एक हैक्टयर से 200 क्विंटल तक उपज संभावित रहती है। उन्होने बताया कि एक बार तना लगाने के बाद 10 साल तक उत्पादन मिलता रहता है। जबकि, संभावना चार दशक तक की है।
बन रहा वीगन लेदर
संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. दीपिका हाजोंग ने बताया कि कैक्टस का इस्तेमाल सिर्फ चारे तक सीमित नहीं रहा है। इसके पत्तों से वीगन लेदर बनाया जा रहा है। जो लोग चमडे के उत्पादों का विकल्प तलाश रहे हैं, उनके लिए यह बेहतरीन है। काजरी में किसानों के लिए प्रदर्शन के तौर पर इस लेदर से बने जैकेट, बेल्ट, पर्स और वॉलेट रखे गए हैं। गौरतलब है कि कैक्टस के फल का उपयोग जूस बनाने में भी हो रहा है