ICAR ने तैयार किया फसल प्रणालियों का एटलस

नई दिल्ली 07-Aug-2026 05:26 PM

ICAR ने तैयार किया फसल प्रणालियों का एटलस

(सभी तस्वीरें- हलधर)

आईसीएआर ने कृषि-जलवायु परिस्थितियों, जल उपलब्धता, संसाधनों और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ‘भारत में फसल प्रणालियों का एटलस’ तैयार किया है। इसके साथ ही चावल, गेहूं, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, चना, सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, कपास, गन्ना, आलू और प्याज सहित 14 प्रमुख फसलों के लिए जिला एवं कृषि-पारिस्थितिकी आधारित फसल योजना तैयार की गई है।

जल-गहन फसलों की खेती

अध्ययन में पाया गया कि देश के 68 जिलों में 650 मिमी से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में करीब 28.9 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हो रही है, जो कुल धान क्षेत्र का 5.67 प्रतिशत है। वहीं 91 जिलों में 700 मिमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में लगभग 7.21 लाख हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जा रही है, जो कुल गन्ना क्षेत्र का 10.76 प्रतिशत है। आईसीएआर का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में फसल विविधीकरण जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और किसानों की आय के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद करेगा।

47 जिलों में लागू किया  मॉडल

सरकार स्थानीय जल उपलब्धता, मृदा की विशेषताओं और कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दे रही है। इसी उद्देश्य से आईसीएआर ने 47 चिन्हित जिलों में फसल विविधीकरण की पायलट परियोजना लागू की है। इसके तहत दलहन, तिलहन, मिलेट्स और बागवानी फसलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सूक्ष्म सिंचाई और वैज्ञानिक खेती पर जोर

आईसीएआर ने विभिन्न फसलों के लिए ड्रिप फर्टिगेशन और वैज्ञानिक सिंचाई प्रबंधन को मानकीकृत किया है, जिससे जल उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सके। वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान परिषद ने 457 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिनसे 8,749 किसान और 4,592 कृषि विस्तार कार्यकर्ता लाभान्वित हुए।

सरकार की विभिन्न योजनाओं से मिलेगा सहयोग

केंद्र सरकार प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रति बूंद अधिक फसल, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, वाटरशेड विकास कार्यक्रम और राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से टिकाऊ कृषि, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा दे रही है |


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