3 बीघा पपीता खेती से किसान कमा रहा 5.5 लाख
(सभी तस्वीरें- हलधर)
पाटिया का खेड़ा, भीलवाड़ा। जहां चाह, वहां राह... इसे सार्थक करते हुए ग्राम पाटियों का खेड़ा के किसान गोपाल लाल गुर्जर ने खुशहाली की ओर जो कदम बढ़ाए तो फिर पीछे मुडक़र नहीं देखा। उनके पास महज 6 बीघा जमीन है। पहले लाख से सवा लाख रूपए की आय मिलती थी। लेकिन, जब से बागवानी से जुड़े है, जमीन के रकबे से ज्यादा कमाने लगे है। बता दें कि किसान गोपाल पपीता और नींबू की बागवानी से जुड़े है। साथ ही, भेड़ पालन भी कर रहे है। किसान गोपाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि हम दो भाईयों के बीच 6 बीघा जमीन है। पहले परम्परागत फसलो का उत्पादन करते थे। इस कारण परिवार का गुजारा चलाना भारी पड़ता था। उन्होंने बताया कि 9वीं बाद पढ़ाई छोड़ दी। समय के साथ रोजी-रोटी की फि क्र हुई तो एक होटल में बागवान का काम करने लगा। करीब 8 साल तक यह काम किया और गांव लौटकर खेती से जुड़ गया। उन्होंने बताया कि खेती से आय बढाने के लिए मैने कृषि विभाग के कार्यक्रमों में जाना शुरू किया। इसके बाद पपीता की खेती का श्री गणेश किया। इससे बीघा भर क्षेत्र में अच्छी आमदनी मिली। इससे मेरा हौंसला बढ़ गया। लेकिन, उस समय खेती को विस्तार देने के लिए जमा पंूजी कम थी। इस कारण एक साल उत्पादन लेकर छोड़ दिया। लेकिन, अब पपीता की खेती से अच्छी आमदनी मिल रही है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलो में कपास, मूंग, गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से डेढ़ 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है
तीन बीघा में बगीचा
उन्होंने बताया कि आय बढाने के लिए फिर से पपीता की खेती का अपनाया है। करीब तीन बीघा क्षेत्र में पपीता का बगीचा स्थापित है। इससे करीब साढे पांच लाख रूपए की आमदनी मिली है। उन्होंने बताया कि पपीता के पौधें तैयार करने के लिए घर पर ही नर्सरी स्थापित की हुई है। वहीं, उद्यान विभाग की अनुदान योजना का लाभ लेते हुए 1 बीघा क्षेत्र में नींबू का बगीचा स्थापित किया है। जो चार साल का हो चुका है। पौधों पर फल अच्छे नजर आ रहे है। लेकिन, अभी नींबू से आमदनी होने में समय लगेगा।
लाभकारी पशुपालन
उन्होने बतााय कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 3 भैंस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। इससे मासिक 13-14 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। इसके अलावा भेड़ पालन से भी जुड़ा हुआ हॅू। 69 भेड़ मेरे पास है। भेड़पालन से सालाना लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाने में कर रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: उषा मीणा, प्रभुदयाल जाट, कृषि विभाग, गुलाबपुरा