सपनों को मिली उड़ान, मेहनत से सालाना आय हुई 18 लाख

नई दिल्ली 12-May-2026 11:57 AM

सपनों को मिली उड़ान, मेहनत से सालाना आय हुई 18 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सेजागुड़ा, राजसमंद। अधूरी ख्वाहिशों से ही, नये मुकाम मिलते है, है पग-पग इम्तिहान, मगर इसी से जीवन ही बनते है...। जी हां, कुछ ऐसी ही अधूरी ख्वाहिशों को पूरा करने में जुटे है किसान पप्पूलाल कुमावत। जिन्होने आय बढ़ौत्तरी के लिए वर्ष 2012 में अपने को तकनीक आधारित खेती से जोड़ा। लेकिन, कुछ कमी रह गई। इसी कमी को पूरा करने के लिए दो-दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र के दो पॉली हाउस स्थापित करवाएं और एक पॉली हाउस से रिकॉर्ड 32 टन खीरे का उत्पादन लिया। साथ ही, 6 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा कमाया। जबकि, टमाटर का उत्पादन जारी है। गौरतलब है कि हाईटेक के साथ ओपन फील्ड सब्जी उत्पादन में किसान पप्पू को अब महारत हासिल हो चुकी है। इसी का परिणाम है कि सालाना 15-18 लाख रूपए की आमदनी प्राप्त कर रहे है। जबकि, पहले मार्बल काटने का काम करते थे। किसान पप्पूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि हम तीन भाईयों के बीच 12 बीघा जमीन है। 8वीं पाास करने के साथ पढ़ाई छोड़ दी। रोजी-रोटी की फि क्र हुई तो मार्बल कटिंग के काम से जुड़ गया। लेकिन, कुछ परिस्थितियों के चलते मुझे खेती-किसानी से जुडऩा पड़ा। वर्ष 2012 में एक-एक हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में दो पॉली हाउस स्थापित करवाएं। इनसे उत्पादन भी अच्छा मिला और प्रगतिशील किसान होने का गौरव भी। लेकिन, समय के साथ पॉली हाउस में उपज गिरती गई। फिर निमेटॉड ने उत्पादन को निगलना शुरू कर दिया। इसके चलते दोनों पॉली हाउस बेच दिए और ओपन फील्ड में सब्जी फसलों का उत्पादन करना शुरू कर दिया। लेकिन, मै तकनीक आधारित खेती को ज्ञान को गंवाना नहीं चाहता था। इसके चलते दो-दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में उद्यान विभाग की सहायता से दो पॉली हाउस स्थापित करवाएं और जुट गया अपनी अधूरी ख्वाहिशों को मुकाम देने के लिए। परिणाम रहा है कि दो हजार वर्ग मीटर से रिकॉर्ड 32 टन खीरे का उत्पादन मिला है। उन्होने बताया कि परम्परागत फसाल में परिवार की आवश्यकता पूर्ति के लिए गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। सिंचाई के लिए हमारे पास कुआं और ट्यूबवैल है। 

टमाटर-खीरे का उत्पादन

उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में खीरा और टमाटर का उत्पादन ले रहा हॅू। टमाटर की फसल से उत्पादन जारी है। अब तक 10 टन माल निकल चुका है। जबकि, खीरे का उत्पादन 32 टन रहा और करीब 6 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा इस फसल से मिला है। उन्होने बताया कि खीरा फसल को निमेटॉड से बचाने के लिए गौमूत्र, सीताफल-नीम पत्ते, ग्वारपाठा आदि को सड़ाकर वानस्पतिक काढ़ा तैयार करता हॅू और ड्रिप के जरिए फसल को दें रहा हॅू। 

8 बीघा क्षेत्र में सब्जी

उन्होंने बताया कि संरक्षित के साथ-साथ मैदानी सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। इनमें फूलगोभी, पत्तागोभी, ब्रोकली, गांठगोभी, मिर्च और टमाटर की फसल शामिल है। इन फसलों से सालाना 7 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होने बताया कि पशुधन में गाय-भैंस का पालन करता हॅू। इनकी संख्या 35 के करीब है। प्रतिदिन 15-20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। परिवार बड़ा होने के चलते दुग्ध की बिक्री नहीं करता हॅू। शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार करता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। 

स्टोरी इनपुट: दिनेशलाल रैगर, सहायक कृषि अधिकारी-उद्यान, देेवगढ़


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