लाखों का पैकेज छोड़, जोड़ा मिट्टी से नाता, सालभर में कमाया 15 लाख का मुनाफा
लाखों का पैकेज छोड़, जोड़ा मिट्टी से नाता, सालभर में कमाया 15 लाख का मुनाफा
(सभी तस्वीरें- हलधर)

अगरपुरा, भीलवाड़ा। किस्मत के सितारें बुलंद करने के लिए बागवानी किसानों के लिए किसी तिजोरी से कम नहीं है। शायद यही कारण है कि उच्च शिक्षित युवा लाखों रूपए का पैकेज छोडक़र बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे है। ऐसे किसान है नरेन्द्र कोहला। जिन्होंने सालाना 19 लाख रूपए पैकेज की नौकरी छोड़ लीज पर जमीन लेकर बागवानी फसलों को उपजाना शुरू किया। परिणाम रहा कि शुरूआती साल में ही शुद्ध 15 लाख रूपए का मुनाफा कमाया है। उनका कहना है कि यह शुरूआत है और निवेश से जमीन तैयार हो चुकी है। इसलिए अब इनपुट कॉस्ट कम होने के साथ ही लाभ बढ़ता चला जायेगा। गौरतलब है कि नरेन्द्र एमबीए होल्डऱ है और कृषि आदान से जुड़ी कंपनी में दशक से ज्यादा काम किया है। लेकिन, अंत में निचोड़ यही है कि फार्मर फैमली से ताल्लुक रखते है तो बिना सोचे समझे किसान बना जाओं। किसान नरेन्द्र ने हलधर टाइम्स को बताया कि मूल रूप से हनुमानगढ़ का रहने वाला हॅू। लेकिन, कृषि आदान कम्पनी में काम करने के दौरान मेवाड़ क्षेत्र से जुड़ाव रहा। उन्होंने बताया कि किसानों के साथ रहते-रहते समय की मांग को पहचाना और अच्छी खासी नौकरी छोडक़र किसान बन गया। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा में 14 एकड़ जमीन लीज पर ली है। इस पर बागवानी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। यह शुरूआती साल है। लेकिन, अब बेहत्तर मुनाफे की जमीन तैयार हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मन में एक उत्साह है कि किसान परिवार से हूॅ और किसान के रूप में खेतों मेंं पसीना बाहाना शुरू कर दिया है।
बागवानी फसलों पर फोकस
उन्होंने बताया कि किसानों को यह समझना होगा कि जो लाभ बागवानी फसलों में है, वो परम्परागत फसलों से कभी नहीं मिलेगा। उन्होंने बताया कि बागवानी फसलों में शुरूआती साल में 2 एकड़ में हल्दी, 4 एकड़ में अदरक, 1 एकड़ में सहजन, एक एकड़ में गंगानगरी गुलाब, 3 एकड़ में तरबूज, 2 एकड़ में सूरजमुखी, 2 एकड़ में जुकनी और 5 एकड़ में स्वीटकॉर्न की उपज ली है। इसमें हलदी की खेती से सवा लाख रूपए प्रति एकड़ का लाभ मिला है।
आधुनिक सिंचाई सुविधा
उन्होंने बताया कि लीज आधारित जमीन निवेश का कार्य पूरा हो चुका है। ड्रिप और पाइपलाइन का जाल बन चुका है। इससे अब केवल इनपुट कॉस्ट ही आयेगी। उन्होंने बताया कि खेतों में पैदा हो रही फसलो की बिक्री भीलवाड़ा में कर रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: डॉ. सीएम यादव, केवीके, भीलवाड़ा