पान मेथी ने बदली किसान की किस्मत, प्रति बीघा लाख कमाई

नई दिल्ली 16-Jan-2026 06:41 PM

पान मेथी ने बदली किसान की किस्मत, प्रति बीघा लाख कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नाडसर, जोधपुुर। खेतों की माटी पर मेहनत का रंग चढ़ा दिया जाएं तो माटी ही नहीं, खेत से भी महक उठती है। खेतों से महक उठाने वाले ऐसे ही किसान है भंवरलाल जाट। जो पान मैथी यानी कसूरी मेथी की ख्ेाती कर रहे है और सालाना 7 से 8 लाख रूपए की आय प्राप्त कर रहे है। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 10-12 लाख रूपए के करीब है। किसान भंवरलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि पहले परम्परागत फसलों के उत्पादन तक सीमित रहा। लेकिन, बाद में उद्यान विभाग के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू किया। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला। साथ ही, खेती में बचत भी नजर आने लगी। गौरतलब है कि किसान भंवरलाल के पास 15 बीघा जमीन है। उन्होने बताया कि पान मेथी से पूर्व प्याज का उत्पादन लेकर देखा। इस फसल से भी अच्छी आमदनी हुई। इसके बाद सब्जी फसलो का दायरा बढाना शुरू किया। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और जल बचत के लिए फव्वारा सिंचाई का उपयोग कर रहा हूूॅ। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में मूंगफली और कपास का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना डेढ़ से दो से  लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।

10 बीघा पान मेथी के नाम

उन्होंने बताया कि पिछले साल 5 बीघा क्षेत्र में पान मेथी बुवाई की थी। इस साल मेथी की फसल ने 10 बीघा जमीन अपने नाम कर ली है। उन्होने बताया कि इस फसल में आय का गणित मौसम पर निर्भर करता है। मौसम के साथ देने पर प्रति बिघा लाख रूपए तक आमदनी मिल जाती है। उन्होंने बताया कि पान मेथी की गुणवत्ता बनाएं रखने के लिए इसे तेज धूप से बचाने की आवश्यकता होती है। साथ ही, कीट-रोग प्रबंधन पर ध्यान देना होता है।

मिर्च-गाजर से भी लाभ

उन्होने बताया कि रबी मौसम में मिर्च और गाजर की बुवाई करता हॅू। इससे रबी की परम्परागत फसलों से ज्यादा लाभ मिल जाता है। उन्होने बताया कि इन दोनों फसलो की बुवाई करीब 5 बीघा क्षेत्र में करता हॅू। इन फसलों से दो लाख रूपए की बचत मिल जाती है।

दुग्ध से घी उत्पादन

उन्होनें बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 1 भैंस है। प्रतिदिन 5 से 7 किलो दुग्ध का उत्पादन होता है। उन्होने बताया कि घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है।

स्टोरी इनपुट: रफीक अहमद कुरैशी, पूर्व सहायक कृषि अधिकारी, भोपालगढ़


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