तकनीक से चमका काला सोना: अफीम खेती में मल्चिंग-ड्रिप क्रांति

नई दिल्ली 01-Jan-2026 06:14 PM

तकनीक से चमका काला सोना: अफीम खेती में मल्चिंग-ड्रिप क्रांति

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। काले सोने के नाम से ख्यात अफीम की फसल में तौल पूरा करने के लिए किसान अब नवाचारी कदम उठा रहे है। ताकि, फसली नुकसान नहीं उठाना पड़े और नारकोटिक्स विभाग का अफीम पट्टा सलामत रहे। प्रदेश के चित्तौडग़ढ़ , प्रतापगढ़ जिले में कई किसान इस वर्ष अफीम की फसल में मल्चिंग, ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर का प्रयोग कर रहे हैं। जिससे अन्य फसलों के साथ ही अफीम की फसल में भी तकनीकी का नजारे साफ तौर पर देखे जा सकते हैं।

प्रकाश और बढ़वार समान

किसानों ने बताया कि मल्चिंग लगाने से सभी पौधे समान दूरी पर रहते हैं। जिससे उन्हें बराबर प्रकाश और बढ़वार के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। शुरुआत से ही विकास अच्छा होता है। वहीं, मल्चिंग खरपतवारों को उगने से रोककर फसल को साफ-सुथरा बनाए रखती है और मिट्टी के तापमान को नियंत्रित करते हुए पौधों की जड़ों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है। इससे रोग व कीटों का प्रकोप भी कम होता है। 

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खेती की कमाई से बेटे को बनाया मास्टर, महिलाओं की बदली जीवन रेखा

सफलता की यह कहानी है रेखा देवी मिश्रा की। जिन्होंने झोपड़ी में रहते हुए अपने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्ती भूमिका निभाई। वहीं, खेती, पशुपालन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु सखी के रूप में राज्य सरकार ने इनको उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। रेखा देवी का कहना है कि लखनऊ से 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जीवन को नई दिशा मिली। इसी का परिणाम है कि खेती और पशुपालन के बिना अब दिन गुजरता नहीं है। यूँ समझों, पशुपालन से जुडऩे के बाद मुझे उड़ान के लिए नये पंख मिल गए है। गौरतलब है कि रेखा पशुओं के वैक्सीनेशन से लेकर पशु उपचार से जुड़ी कई हर्बल दवाएं स्वयं तैयार करती है। उन्होने बताया कि खेती सम्बद्ध कार्यो से सालाना 5-7 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। मोबाइल 77338-47325