4500 रुपये क्विंटल जैविक गेहूं: पाली के किसान की सफलता कहानी

नई दिल्ली 31-Dec-2025 04:02 PM

4500 रुपये क्विंटल जैविक गेहूं: पाली के किसान की सफलता कहानी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पिलोवनी, पाली। पहले जहां गेहूं में 8-10 सिंचाई लगती थी। अब 4-5 सिंचाई देनी पड़ती है। स्वाद भी अच्छा है। उत्पादन भी प्रति बीघा अच्छा मिलने लगा है। गेहूं 4500 हजार रूपए प्रति क्विंटल तो जौ 30-35 रूपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहे है। सरसों ऑयल से भी अच्छा लाभ मिल रहा है। यह अनुभव है जैविक खेती कर रहे किसान दिलखुश राजपुरोहित के। उनकी माने तो जैविक फसल उत्पादन से सालाना 10-12 लाख रूपए की आमदनी मिलने लगी है। जबकि, पहले सालाना 6-7 लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। उन्होंने बताया कि परिवार के पास खेती का रकबा ज्यादा है। करीब 80 बीघा जमीन परिवार के पास है। इस कारण परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य रही। उन्होंने बताया कि 12वीं पास करने के बाद रोजगार के लिए गांव में भी मोबाइल शॉप खोल ली। करीब दशक तक मोबाइल शॉप चलाई। लेकिन, कुछ नया करने की चाहत ने मुझे जैविक खेती से जोड़ दिया। उन्होने बताया कि जैविक उपजाने से पूर्व मैने खेत में सिंचित क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। जल बचत के लिए पहले खेत में पाइपलाइन बिछाई। इसके बाद ड्रिप का उपयोग करना शुरू किया। इससे फसल बुवाई के रकबे में बढौत्तरी हुई। वहीं, आय का आंकड़ा भी बढने लगा। उन्होंने बताया कि एक किसान प्रशिक्षण में जैविक खेती के फायदे देखने-समझने का अवसर मिला। इसके बाद कृषि विज्ञान केन्द्र और यूट्यूब की मदद से जैविक के गुर सीखना शुरू किया। शुरूआत में थोड़ी दिक्कत हुई। लेकिन, अब सभी फसलो के बेहत्तर दाम प्राप्त हो रहे है। उन्होने बताया कि जैविक फसलो में गेहूं, सरसों, जौ और चना का उत्पादन लेता हॅू। साथ ही, हर दो साल बाद सनई फसल की बुवाई भूमि की उर्वरा शक्ति बढोन के लिए करता हॅू। 

6 बीघा में आंवला बगीचा

उन्होंने बताया कि बाजार में जैविक खाद्यान्न ही नहीं, जैविक फ लों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसी सोच के साथ 6 महीने पूर्व 6 बीघा क्षेत्र में आंवले का बगीचा स्थापित किया है। इसके अलावा खेत में सेब बेर, अमरूद, जामुन, आम, अनार के पौधें भी लगे हुए है।

ड्रिप से जैविक खाद

उन्होंने बताया कि खेत पर जैविक इकाई स्थापित की हुई है। उन्होने बताया कि सभी फसलों को लिक्विड़ जैविक खाद देता हॅू। इससे जैविक खाद बेकार नहीं जाती है। उन्होंने बताया कि जैविक खेती के शुरूआती दो साल तो उपज में नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन, अब कोई अंतर मुझे नजर नहीं आ रहा है। फसल में कीट-रोग प्रबंधन के लिए गौ-मूत्र और दूसरे प्राकृतिक पदार्थो से बने घोल का उपयोग कर रहा हॅॅू। इससे कृषि लागत में कमी आई है। जैविक खेती से मैने पाया है कि इससे किफायती खेती दूसरी नहीं है। यह धारणा पूरी तरह से गलत है कि जैविक खेती में कम उत्पादन मिलता है। उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय है। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग जैविक खाद और जैव रसायन तैयार करने में हो रहा है।

स्टोरी इनपुट: चंदन कुमार, झाबरमल तेतरवाल, अरविंद तेतरवाल, मजोज कुमार, काजरी केवीके, पाली


ट्रेंडिंग ख़बरें




हाईटेक से निकली समृद्धि की धार, आमदनी 13 लाख पार

कहते हैं जज्बे के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किल बौनी हो जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है किसान शिवप्रकाश नागर ने। हाईटेक खेती से जुड़कर शिवप्रकाश 6-7 लाख रूपए सालाना का शुद्ध लाभ कमा रहा है। इसके अलावा मैदानी सब्जी फसल, स्ट्रॉबेरी और स्वीटकॉर्न के उत्पादन से भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे है। इससे खेती से सालाना सकल आय का आंकड़ा 13-14 लाख रूपए के करीब पहुंच चुका हॅू। जबकि, वर्ष 2018 से पहले तक किसान शिव प्रकाश को परम्परागत फसलों के उत्पादन से सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। उनका कहना है कि किसान भ्रमण कार्यक्रम ने खेती को नई दिशा देने का काम किया है। मोबाइल 84325-61316