खेती का गेम चेंजर मॉडल: सब्जी-फसल-पशुपालन से 15 लाख कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)
अरनिया, प्रतापगढ़। जीवन की सफलता को लिखने के लिए ना ब्लेक बोर्ड चाहिए और ना ही चौक। खेतों की माटी का रंग ही मेहनत का परिचय देना शुरू कर देता है। ऐसे ही किसान है श्यामलाल सुथार। जो अब भी परम्परागत फसलों का उत्पादन ले रहे है। लेकिन, सालाना बचत का आंकड़ा 15 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। जबकि, पहले 3-4 लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। उन्होने बताया कि यह सब उन्नत कृषि तकनीक उपयोग का कमाल है। किसान श्याम लाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि 8वीं पास करने के बाद से खेती से जुड़ा हुआ हॅू। पहले सिंचाई की समस्या थी। साथ ही, पुरातन पद्धति से खेती क रता था। इस कारण जमीन से सालाना तीन से चार लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। फिर, कृषि और उद्यान विभाग के कार्यक्रमों में भाग लेना शुरू किया। यहां से नई कृषि तकनीकों को जानने समझने का मौका मिला। इस ज्ञान को अपने खेतों में जगह देना शुरू किया। परिणाम रहा कि फसल उत्पादन के साथ-साथ आय का आंकड़ा भी समय के साथ बढ़ता चला गया। यह संभव हुआ है फसल विविधिकरण से। अब परम्परागत के साथ-साथ खेतों में सब्जी और औषधीय फसल का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसल में लहसुन, मेथी, गेहूं, सरसों, अलसी और सोयाबीन का उत्पादन लेता हॅू। सारा खर्च निकालने के बाद 15 लाख रूपए की बचत मिल जाती है।
प्याज-लहसुन भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि 6-7 साल से प्याज-लहसुन की खेती कर रहा हॅू। इस फसल में किसी साल भाव तेज तो कभी मंदे रहते है। इससे कभी मुनाफा बढ़ जाता है तो कभी घट जाता है। इससे औसत 3-4 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
सब्जी भी लाभकारी
उन्होने बताया कि सब्जी फसल में मटर का व्यवसायिक उत्पादन लेता हॅू। जबकि, तुरई, लौकी, भिंड़ी आदि फसलों की बुवाई सीमित करता हॅू। इससे परिवार को जैविक सब्जी मिल जाती है। वहीं, थोड़ी बहुत आय भी मिल जाती है।
खसखस से भी आय
उन्होने बताया कि 10 आरी अफीम का पट्टा मेरे पास है। जिस साल मौसम साथ देता है, खसखस से अच्छी आमदनी मिल जाती है। उन्होने बताया कि पोस्त दाने से सालाना सवा से डेढ़ लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
उन्नत पशुधन
उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 भैंस और 3 गाय है। प्रतिदिन 20 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। इनमें से आधा दुग्ध डेयरी को 32 से 33 रूपए प्रति लीटरकी दर से बिक्री कर देता हॅॅू। इससे थोड़ी बहुत आय मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके खेतों में उपयोग कर रहा हॅू।
स्टोरी इनपुट: ललित गिरी गोस्वामी, उद्यान विभाग, प्रतापगढ़