किन्नू से चल निकली साइकिल, कमाई 4 लाख

नई दिल्ली 29-Nov-2025 01:00 PM

किन्नू से चल निकली साइकिल, कमाई 4 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

करीनपुरा, धौलपुर। जीवन संघर्ष की यह कहानी है किसान रामवीर सिंह राना की। जिन्होंने साइकिल से ना केवल खेतों को रिपेंयर किया। बल्कि, आय को भी रसीला बना लिया। वहीं, जैविक खेती में भी पदचाप भर ली। इससे हजार में अटका रहने वाला आय का आंकड़ा अब लाखों में पहुंच चुका है। किसान रामवीर ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 10 बीघा जमीन है। खेती मेें जो भी बदलाव हुआ, वो कृषि विभाग की देन है। उन्होने बताया कि अब किन्नू की खेती से पहले को जीवन काफी संघर्ष भरा रहा। लेकिन, अब साइकिल रफ्तार पकड़ चुकी है। इससे उम्मीद है कि आगामी सालों मेें आय भी फर्राटे भरेगी। उन्होने बताया कि प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद ही स्कूल से नाता टूट गया। होश संभालने के साथ खुद को खेतों में पाया। पहले जमीन बरानी थी। इस कारण परिवार का खर्च चलाने में भी दिक्कत होती थी। इस स्थिति को देखते हुए गांव में ही साइकिल रिपेंयर की दुकान खोली। इससे जो भी मिला, उस राशि से वर्ष 1997-98 में एक कुआं खुदवाया। इससे पूरी जमीन में खेती होने लगी और फसल के साथ-साथ आय की रफ्तार बढने लगी। उन्होंने बताया कि खेती में जो भी बदलाव आया है, वह कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन का ही परिणाम है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, चना, मूसर, बाजरा, तिल और ढ़ैचा की फसल लेता हॅू। इन फसलों से सालाना डेढ़ लाख रूपए की आय हो जाती है। गौरतलब है कि किसान रामवीर कृषि लागत घटाने के लिए फसल उत्पादन में जैविक तौर-तरीके अपना रहे है।  

दशक पुराना किन्नू बगीचा

उन्होंने बताया कि आय बढौत्तरी के लिए वर्ष 2014 मेें पौने दो बीघा क्षेत्र में किन्नू का बगीचा स्थापित किया। इस बगीचे से सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की आय मिल जाती है। उन्होने बताया कि किन्नू की खेती से ही परिवार की आर्थिक स्थिति में निरतंर सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होने बताया कि डेढ़ बीघा क्षेत्र में नींबू का बगीचा स्थापित किया हुआ है। इससे शुरूआती उत्पादन मिलने लगा है। इसके अलावा 30-40 पौधें मौंसमी के भी लगाएं है।

तैयार करते है घी

उन्होनेे बताया कि पशुधन में मेरे पास एक आय और तीन भैंस है। प्रतिदिन 10 लीटर दुग्ध का उत्पादन होता है। उन्होंने बताया कि घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट का उपयोग वर्मी खाद बनाने में हो जाता है। वर्मी की 4 बेड़ मेरे पास है।

स्टोरी इनपुट: सत्यनारायण चौधरी, आईएचआईटीसी, जयपुर


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