बरसाती पानी से राजेन्द्र ने कैसे बढ़ाई आमदनी, हाईटेक खेती का क्या है राज

नई दिल्ली 15-Nov-2025 12:17 PM

बरसाती पानी से राजेन्द्र ने कैसे बढ़ाई आमदनी, हाईटेक खेती का क्या है राज

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नागवाडा, डीडवाना-कुचामन। फार्मपौंड़ प्रदेश के किसानों की तकदीर और खेती की तदबीर बदल रहे है। बरसाती पानी के सहारे में खेती में नवाचार करने वाले ऐसे ही किसान है राजेन्द्र चौधरी। जो काफी समय से रसातल समाते पानी की पीड़ा को झेल रहे थे और समझ भी रहे थे। लेकिन, अब इनके खेतों में परम्परागत के साथ-साथ हाईटेक फसल का उत्पादन हो रहा है।   इससे सालाना आय का आंकड़ा साढे तीन लाख रूपए तक जा पहुंचा है। गौरतलब है कि सिंचाई के लिए किसान के पास ट्यूबवैल था। फिर भी, पानी की खींच बनी रहती थी। लेकिन, फार्मपौंड ने खेती की तस्वीर बदलकर रख दी। किसान राजेन्द्र ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास साढे आठ बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए एक ट्यूबवैल है। लेकिन, सिंचाई की मार हमेशा बनी रहती थी। इस कारण आधी से थोड़ी कम जमीन पर रामभरोसे खेती होती थी। लेकिन, फार्मपौंड खुदवाने के बाद हालात बदल चुके है। फार्मपौंड के पानी से रबी-खरीफ फसलो का बेहत्तर उत्पादन मिलने लगा है। उन्होने बताया कि सिंचाई सुविधा विकसित होने से ज्यादा जमीन में सिंचाई का लाभ मिल रहा है। साथ ही, अब बेहत्तर आमदनी के लिए हाईटेक खेती का रूख भी कर लिया है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलो में मंूगफली, बाजरा, ग्वार, मूंग, गेहूं, जौ, चना, सरसों और मैथी फसल का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सारा खर्च निकलने के बाद दो लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। गौरतलब है कि किसान राजेन्द्र स्नातक के साथ-साथ खेती का कार्य भी संभाल रहे है। 

हाईटेक से बढ़ी आय

उन्होंने बताया कि फार्मपौंड खुदवाने के बाद उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजना का लाभ लेते हुए 2 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में एक पॉली हाउस लगाया है। इसमें पहली फसल खीरे की ली है। उन्होने बताया कि संरक्षित खेती की तकनीकी जानकारी नहीं होने के चलते पॉली हाउस से ज्यादा लाभ नहीं मिल पाया। लेकिन, आगामी फसल से बेहत्तर आमदनी की उम्मीद है। उन्होने बताया कि पॉली हाउस से सारा खर्च निकालने के बाद 50-60 हजार रूपए की आमदनी मिली है। 

बकरीपालन लाभकारी

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 भैंस और दो गाय है। साथ ही, 10-15 बकरियां है। प्रतिदिन तीन से चार किलो दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, बकरीपालन से सालाना 40-45 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।

स्टोरी इनपुट: अभिषेक सिंह, चंदू जांगिड़, महेश भगत, वैभव दाधीच, कृषि विभाग, डीडवाना-कुचामन