अनार से जमीं गुलजार , कमाई 18 लाख सालाना

नई दिल्ली 16-Dec-2025 03:36 PM

अनार से जमीं गुलजार , कमाई 18 लाख सालाना

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जागसा, बालोतरा। मेहनत और हौंसला हो तो सूखी जमीन भी गुलजार हो जाती है। किसान राजेश चौधरी ने यही किया है। रसातल समाते पानी को देखते हुए किसान राजेश ने अनार की बागवानी की ओर कदम बढ़ाया। परिणाम यह रहा कि सूखी जमीन से 15 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिलने लगी है। जबकि, पहले परम्परागत फसल उत्पादन से 3 लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। किसान राजेश ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 35 बीघा जमीन है। रसातल समाते पानी को देखते हुए 10 साल पहले अनार की बागवानी करना शुरू किया। परिणाम रहा है कि अब खेतों से लाखों रूपए की आय मिलने लगी है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिला है। गौरतलब है कि किसान राजेश 12वीं पास करने के बाद से खेती का काम संभाल रहा है। उन्होंने बताया कि पहले इस जमीन में परम्परागत फसलों की खेती करता था। समय के साथ सिंचाई की समस्या गहराती चली गई। इस कारण परम्परागत फसलों की पैदावार लेना मुश्किल हो चला था। लेकिन, बागवानी के बाद अब परम्परागत फसलों से भी अच्छी आमदनी मिल रही है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, बाजरी का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 3-4 लाख रूपए का मुनाफा मिल जाता है।

23 बीघा में अनार

उन्होंने बताया कि आमदनी बढाने के लिए दशक पूर्व अनार की खेती का श्रीगणेश किया। वर्तमान में मेरे पास अनार के 2300 पौधें है। इसमें 10 साल के बगीचे से सालाना 14-15 लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल रही है। जबकि, 4 साल के बगीचे से अभी आमदनी मिलना शेष है।

दुग्ध से भी अच्छी आय

उन्होंने बताया कि पशुपालन में मेरे पास 4भैंस है। प्रतिदिन 25-30 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल जाता है। उन्होंने बताया कि दुग्ध का विपणन डेयरी को 60 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रहा हॅू। इससे पशुपालन का खर्च निकल जाता है। वहीं, मासिक 20- 25 हजार रूपए की बचत मिल रही है। वहीं, पशु अपशिष्ट खेत में काम आ रहा है।


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दुबई रिटर्न ने सब्जी से हरे किए धोरे, सालाना कमाई 12 लाख

कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901


खेती की कमाई से बेटे को बनाया मास्टर, महिलाओं की बदली जीवन रेखा

सफलता की यह कहानी है रेखा देवी मिश्रा की। जिन्होंने झोपड़ी में रहते हुए अपने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्ती भूमिका निभाई। वहीं, खेती, पशुपालन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु सखी के रूप में राज्य सरकार ने इनको उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। रेखा देवी का कहना है कि लखनऊ से 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जीवन को नई दिशा मिली। इसी का परिणाम है कि खेती और पशुपालन के बिना अब दिन गुजरता नहीं है। यूँ समझों, पशुपालन से जुडऩे के बाद मुझे उड़ान के लिए नये पंख मिल गए है। गौरतलब है कि रेखा पशुओं के वैक्सीनेशन से लेकर पशु उपचार से जुड़ी कई हर्बल दवाएं स्वयं तैयार करती है। उन्होने बताया कि खेती सम्बद्ध कार्यो से सालाना 5-7 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। मोबाइल 77338-47325