बूंद-बूंद से आय में रवानी, बचत 15 लाख सालाना
(सभी तस्वीरें- हलधर)
ऊंडवा, कोटा। बूंदों की अपनी अलग कहानी है, कही क्रांति तो कही खेतों में रवानी है। जी हां, सिंचाई के मायने किसान से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता। क्योंकि, फसल उत्पादन ही नहीं, किसान को पूरा आर्थिक तंत्र ही बूंदो पर निर्भर करता है। इस बात को समझा है किसान सांवलिया धाकड़ ने। जो बूंद-बूंद के सहारे ओपन फील्ड में सब्जी फसलो का उत्पादन कर रहे है। साथ ही, प्रति बीघा 80 हजार से एक लाख रूपए तक आमदनी प्राप्त कर रहे है। जबकि, खेती से सकल आय का आंकड़ा करीब 15-16 लाख रूपए के करीब है। किसान सांवलिया ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 33 बीघा कृषि भूमि है। उनहोंने बताया कि 10वीं पास करने के साथ ही खेती से जुड़ गया। लेकिन, उस समय महज 8 बीघा क्षेत्र में खेती होती थी। इस कारण परिवार की रहगुजर चलाना भी भारी पड़ता था। लेकिन, अब बूंद-बूंद से हालात बदल चुके है। जो खेत कभी बारानी रहते थे, अब उनसे लाखो मिल रहे है। उन्होंने बताया कि कई साल तक बारानी खेती की। इससे थोड़ी-थोड़ी बचत करके वर्ष 2014 में कुआं खुदवाया। बाद में नहर का पानी भी उपलब्ध होने लगा। पूरी जमीन में सिचाई सुविधा विकसित होने के बाद आय बढौत्तरी के बार में सोचना शुरू किया। यह तलाश सब्जी फसलों पर जाकर खत्म हुई। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में लहसुन, चना, सोयाबीन और मूंगफली का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना 5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
7 बीघा में सब्जी
उन्होने बताया कि खेत में सिंचाई सुविधा विकसित होने के दो साल बाद ही सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू कर दिया। वर्तमान में 7 बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन ले रहा हॅू। सब्जी फसलों में गोभी, टमाटर, खीरा का उत्पादन लेता हॅॅू। इन फसलों से सालाना 80 से लाख रूपए प्रति बीघा की बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि थोड़ा-थोड़ा करके 20 बीघा क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में ला चुका हॅू।
अब बागवानी का रूख
उन्होने बताया कि उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजना का लाभ उठाते हुए एक हैक्टयर क्षेत्र में संतरे का बगीचा स्थापित किया है। पौधें डेढ़ साल के हो चुके है। उन्होने बताया कि अभी बगीचे से उत्पादन और आय मिलने में दो साल और लगेंगे।
