औषधीय खेती से कमाल, दो बीघा में तीन लाख आमदनी
(सभी तस्वीरें- हलधर)
काछबली, राजसमंद। जैविक औषधीय फसल और इंटर क्रॉपिंग से कृषिगत आय को लाखों में बदला जा सकता है। यकीन नहीं है तो मिलिए किसान हजारी सिंह रावत से। जो पहले परम्परागत फसलों के उत्पादन से सालाना 50-60 हजार रूपए कमाते थे। लेकिन, अब औषधीय फसल के उत्पादन से सालाना तीन लाख रूपए की आमदनी प्राप्त कर रहे है। गौरतलब है कि किसान हजारी सिंह जड़ी-बूटी युक्त सफेद मूसली की बर्फी भी तैयार कर रहे है। किसान हजारीलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के बंटवारे के बाद 4 बीघा जमीन हिस्से आई। खेती से जुडऩे के बाद परम्परागत फसलों का उत्पादन लेता रहा। लेकिन, बढ़ते खर्च से पार पाने के लिए कुछ नया करना जरूरी हो गया था। उन्होंने बताया कि प्रवास के दौरान औषधीय फसल उत्पादक किसानों से मुलाकात हुई। फिर, उनके खेत पर जाकर सफेद मूसली सहित दूसरी औषधीय फसलो के उत्पादन को देखा। यही से आर्थिकी का चक्र घूमाने का आइडिया मिला और अब परिणाम सबके सामने है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए एक कुआं है और परिवार की आवश्यकता पूर्ति के लिए दो बीघा में गेहूं, जौ, मैथी और चना फसल का उत्पादन लेता हॅॅू। इन फसलों से थोड़ी बहुत आय मिल जाती है।
सफेद मूसली की खेती
उन्होने बताया कि सफेद मूसली की खेती ने परिवार की आर्थिकी को बदलने का काम किया है। इस फसल की शुरूआत थोड़ी सी जमीन से हुई। लाभ अच्छा मिला तो बुवाई क्षेत्र बढ़ा दिया। वर्तमान में दो बीघा जमीन में सफेद मूसली का उत्पादन ले रहा हॅू। इससे सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। उन्होने बताया कि सफेद मूसली का उपभोक्ताओ की मांग पर सफेद मूसली की बर्फी भी तैयार करके उपलब्ध कराता हॅू।

जड़ी-बूटी का गार्डन
गौरतलब है कि किसान हजारी सिंह जड़ी-बूटी के भी जानकार है। शायद यही कारण है कि इनके खेत में विभिन्न रोगों के उपचार में आने वाली जड़ी-बूटी भी फल-फूल रही है। इनमें काली मूसली, कालमेघ, सतावरी, पिंपरमेंट, पत्थर चट्टा, हथजोड़, कौंच, सर्पगंधा, गुडमार सहित कई जड़ी-बूटियों का उत्पादन हो रहा है।
पपीता से भी आय
उन्होंने बताया कि पपीता की खेती काफी लाभकारी साबित हो रही है। एक पौधें से डेढ़ दो क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। उन्होने बताया कि पपीता के तीन दर्जन करीब पौधें लगाएं हुए है। इस तरह सालाना 25 से 30 हजार रूपए की आमदनी हो जाती है।
उन्नत पशुधन
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय है। गायों का दूध घर में काम आ जाता है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद के साथ-साथ जैव कीटनाशक तैयार करके उपयोग करता हॅू।