स्ट्रॉबेरी और सब्जी से कमाई, किसान देवकरण छाए

नई दिल्ली 05-Feb-2026 12:08 PM

स्ट्रॉबेरी और सब्जी से कमाई, किसान देवकरण छाए

(सभी तस्वीरें- हलधर)

मीठड़ी, डीडवाना-कुचामन। बरसाती पानी आय का आसमान देने वाले किसान है देवकरण कुमावत। जिन्होंने पग-पग पर मिले मार्गदर्शन से अपनी तदबीर ही नहीं, खेती की तस्वीर को भी बदला है। इससे कमाई का आंकड़ा चार गुना तक बढ़ चुका है। किसान देवकरण ने बताया कि फार्मपौंड निर्माण से पूर्व सालाना 3 लाख रूपए की आय होती थी। जो अब बढक़र 15 लाख रूपए तक पहुंच चुकी है। किसान देवकरण ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास तीन हैक्टयर जमीन है। 10वीं पास करने के बाद से खेती से जुड़ा हुआ हॅू। उन्होंने बताया कि पहले तो खेती लाभकारी लगती रही। लेकिन, बाद में पानी की गुणवत्ता बिगडऩे और भू-जल स्तर में आई गिरावट परिवार की आर्थिकी को चुनौति देने लगी। इस स्थिति में फार्मपौंड का पानी संकट मोचक बन गया। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की मदद से फार्मपौंड खुदवाया। फिर, जल बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई को अपनाया। इसके बाद सब्जी फसलों का उत्पादन लेना शुरू कर दिया। इस तरह कारवां आगे बढता रहा। साथ ही, आमदनी में भी बढौत्तरी देखने को मिली। उन्होंने बताया कि उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक हरिओम सिंह राणा ने मेरी मेहनत को देखते हुए मुझे स्ट्राबेरी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं, उद्यान विभाग के राजेन्द्र ढाका से मुझे स्ट्रॉबेरी उत्पादन का तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। परिणाम रहा कि 12 बेड़ तैयार करके स्ट्रॉबेरी किस्म विंटर डॉन और कैम्ब्रिजा के कुल 3 हजार पौधें लगाएं। इससे उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि स्ट्रॉबेरी को 200 ग्राम का पैक तैयार करके 50 रूपए के भाव से बिक्री कर रहा हॅू। 

तकनीक आधारित सब्जी उत्पादन

उन्होंने बताया कि कृषि-उद्यानिकी अधिकारियों के मार्गदर्शन में चार साल पूर्व सब्जी उत्पादन लेना शुरू किया। उन्होने बताया कि सब्जी फसलों में 8 बीघा में प्याज, 2 बीघा में टमाटर, 1-1 बीघा में बैंगन, पत्तागोभी, डेढ़ से दो बीघा में लहसुन और एक बीघा क्षेत्र में गाजर की फसल लेता हूूॅ। इसके बाद जायद फसलों की बुवाई कर देता हॅू। इस तरह सालाना 15 लाख रूपए की आय मिल रही है। गौरतलब है कि किसान देवकरण ड्रिप-मल्च, लोटनल तकनीक का उपयोग कर रहे है। साथ ही, सोलर पंप भी इनके यहां लगा हुआ है। 

पशुपालन भी लाभकारी

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और एक भैंस है। प्रतिदिन 10-12 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट केंचुआ खाद बनाने मे काम आ जाता है। वर्मी कम्पोस्ट की दो बेड़ मेरे पास है। 

स्टोरी इनपुट: वैभव दाधीच, महेश भगत, राजू इनाणिया, कृषि विभाग, डीडवाना-कुचामन


ट्रेंडिंग ख़बरें