कभी मिलते थे 10 हजार, अब 24 लाख  मुकेश जाट की हाइटेक खेती की कहानी

नई दिल्ली 06-Nov-2025 12:24 PM

कभी मिलते थे 10 हजार, अब 24 लाख  मुकेश जाट की हाइटेक खेती की कहानी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

तीन साल पहले तक प्रति बीघा 10-12 हजार रूपए की बचत मिलती थी। जबकि, पानी की कोई समस्या नहीं थी। लेकिन, लाख मेहनत करने के बाद भी परम्परागत फसलो से इतना ही मिल पाता था। इस कारण दो पैसे खर्च करने के बारे में भी सोच विचार करना पड़ता था। परन्तु, अब हाइटेक खेती ने नौकरी के साथ-साथ दूसरी सभी चिंताओं को दूर कर दिया है। खेत में अब तीसरा नेट हाउस बनने जा रहा है। यह कहना है किसान मुकेश जाट का। जो एमएड़ करने के बाद हाइटेक खेती से जुड़े और सालाना 24 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा कमा रहे है। मोबाइल 80059-64251 

मोठसरा, हनुमानगढ़। खेती से प्रति बीघा आय बढानी है तो किसान हाइटेक खेती को अपनाएं। यह बात हम नहीं, एमएड़ पास किसान मुकेश जाट कह रहे है। उनका कहना है कि हाइटेक खेती में थोड़ा निवेश ज्यादा है। लेकिन, एक बार तकनीक समझ आने के बाद प्रति बीघा मिलने वाला रिर्टन परम्परागत की तुलना में कई गुना ज्यादा होता है। गौरतलब है कि किसान मुकेश जाट हाइटेक खेती से सालाना 24 लाख रूपए का मुनाफा कमा रहे है। किसान मुकेश ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 30 बीघा जमीन है। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के कारण मेरा खेती से ज्यादा ध्यान पढ़ाई पर रहा। एमएड़ करने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने लगा। लेकिन, सफलता नहीं मिली। इस स्थिति को देखते हुए मैने खेती संभालना शुरू किया। उन्होने बताया कि खुद के खेती संभालने के बाद परम्परागत फसलों से आय का गणित समझ आया। प्रति बीघा 10-12 हजार रूपए का मुनाफा मिलता था। प्राकृतिक आपदा की स्थिति में लागत भी नहीं निकलती थी। इस स्थिति को देखते हुए सरकार की अनुदान योजना का लाभ उठाते हुए तीन साल पहले 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में पॉली हाउस का निर्माण करवाया। पहले ही साल में खीरे की फसल से लाखों रूपए की आय मिली तो नौकरी का विचार और भविष्य की चिंता जहन से जाती रही। उन्होने बताया कि अब खेत में दूसरा शैडनेट हाउस बनने जा रहा है। गौरतलब है कि किसान मुकेश परम्परागत फसलों में ग्वार, बाजरा, मूंग, मोठ, चना और सरसों का उत्पादन लेते है। सिंचाई के लिए डिग्गी, ट्यूबवैल और नहरी पानी उपलब्ध है।


12 हजार वर्ग मीटर में संरक्षित खेती
उन्होंने बताया कि तीन साल पहले पॉली हाउस का गणित समझ आने के बाद 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में एक शैडनेट हाउस स्थापित करवा लिया। पॉली और नेट हाउस में खीरा फसल का उत्पादन ले रहा हॅू। उन्होंने बताया कि 4 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में एक शैडनेट हाउस इन दिनों निर्माणाधीन है। इस तरह पखवाड़े बाद 12 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र हाइटेक खेती के अन्तर्गत आ जायेगा। 


मुनाफा 24 लाख
उन्होंने बताया कि पॉली और नेट हाउस में साल मेें दो फसल खीरे की ले रहा हॅॅू। सारा खर्च निकालने के बाद एक संरक्षित संरचना से सालाना 10-12 लाख रूपए का मुनाफा मिल जाता है। इस तरह 24 लाख रूपए का सालाना मुनाफा संरक्षित खेती से मिल रहा है। उन्होने बताया कि पॉली हाउस फसल में नहरी पानी का उपयोग करता हॅू। 


पशुपालन से भी लाभ
उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास दो गाय और दो भैस है। प्रतिदिन 5 से 7 किलो दुग्ध का विपणन डेयरी को करता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट खेतों में काम आ जाता है। 

 


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