8वीं पास किसान की वर्मी‑खाद से कमाई 22 लाख!
(सभी तस्वीरें- हलधर)
हलधर टाइम्स/ चित्तौडग़ढ़।
पालका। आठवीं पास व्यक्ति की क्षमताओं को भी कम नहीं आका जा सकता। क्योंकि, सफलता का कोई छोर नहीं है। यहां हम बात कर रहे है किसान भैरूलाल धाकड़ की। जो स्वयं आठवीं पास है। लेकिन, अपने साथ-साथ चार कृषि मजदूरों का 12 महीने रोजगार उपलब्ध करवा रहे है। साथ ही, गोबर से 15 लाख रूपए सालाना की शुद्ध बचत प्राप्त कर रहे है। जबकि, सकल आय का आंकड़ा 22 लाख रूपए के करीब है। किसान भैरूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास 10 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि पिताजी की सूरत बाद बड़ा होने पर ध्यान पड़ी। वहीं, बाद में मां भी छोडक़र चली गई। ऐसे में 8वीं तक ही पढ़ पाया। परिवार की जिम्मेदारी निभाने और रोजी-रोटी के लिए संघर्ष शुरू हुआ तो कई उद्यम निकल गए। शुरूआत में गांव में ही परचून की दुकान खोल ली। करीब 6 साल यह काम करने के बाद ट्रेक्टर थ्रेसर खरीद कर फसल गहाई का काम शुरू किया। इसके बाद एक गाड़ी से सब्जी सप्लाई करने लगा। ये सब काम करने के बाद भी आय का आंकड़ा कम लगा तो पूरी तरह से किसान बनकर खेतों मेें उतर गया। परिणाम रहा कि 5 साल के भीतर ही एक ही उद्यम से आमदनी बचत का आंकड़ा 15 लाख रूपए से ज्यादा पहुंच गया। जबकि, सकल आय बढक़र 22 लाख रूपए हो गई। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है और परम्परागत फसलों में गेहूं, चना, जौ, मूंगफली, मक्का का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
सब्जी भी लाभकारी
उन्होंने बताया कि एक बीघा क्षेत्र में सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅू। सब्जी फसलों मे टमाटर, बैंगन, मिर्च, पपीता का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से भाव अच्छे रहने पर औसतन 3-4 लाख रूपए की आमदनी आसानी से मिल जाती है। उन्होंने बताया कि नींबू का बगीचा नष्ट करने के बाद कटहल का बगीचा स्थापित किया है। बगीचे में 90 पौधे लगे हुए है। इनसे शुरूआती उत्पादन मिलना अभी शेष है।
जैविक खाद से बरसी लक्ष्मी
उन्होंने बताया कि सब काम से थकहारकर गोबर का उद्यम शुरू किया। 5 साल पहले 114 बेड़ के साथ गोबर से वर्मीकम्पोस्ट खाद बनाना शुरू किया। शुरूआती उत्पादन से मुनाफा अच्छा मिला तो यह व्यवसाय रास आ गया। उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट यूनिट स्थापना से मेरे साथ-साथ 4 कृषि मजदूरों को रोजगार मिला हुआ है। वहीं, 15 लाख रूपए की बचत इस व्यवसाय से मिल रही है।

मिनी डेयरी के मालिक भी
उन्होंने बताया कि वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के लिए पशुधन की संख्या में भी बढ़ाई। वर्तमान में मेरे पास 13 एचएफ नस्ल की गाय है। प्रतिदिन 70-80 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। इससे मासिक 80-90 हजार रूपए की आमदनी मिलती है। जबकि, शुद्ध बतच का आंकड़ा 40 हजार रूपए के आस-पास रहता है।