बकरीपालन ने बदली किस्मत, 70 बकरियों से लाखों की कमाई

नई दिल्ली 20-Jan-2026 02:18 PM

बकरीपालन ने बदली किस्मत, 70 बकरियों से लाखों की कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

तारातरामठ, बाड़मेर। थार में जीवन निर्वाह के साथ-साथ कृषिगत आय में बढौत्तरी किसानों के लिए किसी चुनौति से कम नहीं है। लेकिन, समय के साथ थार अपनी सूरत बदल रहा है। बात चाहे आधुनिक कृषि तकनीक की हो या फिर पशुपालन की, दोनों क्षेत्र में ही उत्साहजनक परिणाम देखने को मिल रहे है। बकरी और पशुपालन से अपनी जीवनरेखा को बदलने वाली ऐसी ही प्रगतिशील महिला किसान है भंवरी देवी। जो 12 से 13 लाख रूपए की सकल आय प्राप्त कर रही है। उनका कहना है कि बकरी और पशुपालन ने घर में समृद्धि लाने का काम किया है। किसान भंवरी देवी ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 36 बीघा कृषि भूमि है। परिवार की रहगुजर का पहले यही जरिया था। लेकिन, अब इसके जितनी आय बकरीपालन से मिलने लगी है। उन्होंने बताया कि सिंचाई समस्या के चलते 5 साल पहले तक परम्परागत फसल उत्पादन तक सीमित रहे। लेकिन, बढते खर्च और खेती से मिलने वाली का समय के साथ गणित गड़बड़ाना शुरू हो गया। इस स्थिति को देखकर मन ही मन बैचेनी रहने लगी। बाद में कृषि जानकारों ने बकरीपालन से जुडऩे के लिए कहा। इसके बाद 10 बकरियों से बकरीपालन का काम शुरू किया और यह परिवार के लिए आय का सशक्त जरिया बन गया। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में रायड़ा, सरसों, बाजरा, मूंगफली और ग्वार का उत्पादन लेती हॅू। इन फसलों से सालाना 4 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

10 से 70 हुई बकरी

उन्होंने बताया कि पांच साल पहले 10 बकरी से उद्यम की शुरूआत की। वर्तमान में मेरे पास 70 बकरिया है। इनसे सालाना 4 लाख रूपए की आमदनी आसानी से मिल जाती है। उन्होंने बताया कि बकरीपालन की लागत काफी कम है। समय पर रोग प्रबंधन पर ध्यान देने पर यह व्यवसाय लाभकारी बना रहता है। 

पशुपालन से भी लाखों

उन्होंने बताया कि बकरीपालन में सफलता मिलने के बाद पशुधन का कुनबा बढाना शुरू किया। इससे भी परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला। उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 20 भैंस और 15 गाय है। प्रतिदिन 60 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। उन्होने बताया कि दुग्ध की बिक्री 40 रूपए प्रति लीटर की दर से कर रही हॅू। इससे सालाना 5 लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. रावताराम, डॉ. अनिता कुमारी, पशुपालन विभाग, बाड़मेर