नगीना तराशते-तराशते, गेंदा क्यों उपजाने लगा यह किसान
(सभी तस्वीरें- हलधर)
निदड़, जयपुर। खेती से लाभ कमाने का जुनून हो तो किसान करत-करत अभ्यास... की तर्ज पर बहुत जल्द समृद्धि पा सकता है। किसान बाबूलाल सैनी को ही देखिएं। परम्परागत फसलों से लाभ नहीं मिलने के चलते फूलों की खेती का रूख किया और प्रति बीघा लाख रूपए की शुद्ध बचत लेने में कामयाब रहे। गौरतलब है कि किसान बाबूलाल गेंदा फूल की वार्षिक खेती करते है। करीब 12 बीघा जमीन इन्होने गेंदा फूल के नाम की हुई है। किसान बाबूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि फूलों की खेती से आय का आंकड़ा रकबे से दोगुना हो गया। गौरतलब है कि खेती बाबूलाल को सालाना 12 लाख रूपए की कमाई मिल जाती है। उन्होंने बताया कि मेंरे पास 14 बीघा जमीन है। सिंचाई के लिए दो ट्यूबवैल और एक सोलर पंप संयंत्र लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि 8वीं पास करने के बाद पहले नगीनों का काम किया। लेकिन, इस व्यवसाय में एक समय वो भी आया जब लेबर का खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया। इसके बाद खेती से जुड़ गया। उन्होने बताया कि पहले तो परम्परागत फसलो का उत्पादन लेता रहा। लेकिन, अब फूल और सब्जी उत्पादन तक सीमित हो चुका हॅू। क्योंकि, इस खेती में रकबे से ज्यादा कमाई है।
प्रति बीघा लाख
उन्होने बताया कि 12 बीघा क्षेत्र में गेंदे की अलग-अलग किस्मों का उत्पादन लेता हॅू। इससे फसल चक्र भी बना रहता है। उन्होने बताया कि गेंदा फूल की खेती में प्रति बीघा 2 लाख रूपए की सकल आय मिलती है। इसमें से एक लाख रूपए का खर्च भी माने तो एक लाख रूपए की शुद्ध बचत मिल जाती है।
सब्जी भी आय
उन्होने बताया कि फूलों के साथ-साथ सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅू। 6 बीघा क्षेत्र में मटर की फसल से 50-60 हजार रूपए प्रति बीघा की आय हो जाती है। वहीं, ग्वार की फसल से लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। जबकि, परम्परागत फसल में परिवार की रहगुजर लायक गेहूं का उत्पादन कर रहा हूॅ।
दुग्ध से आय
पशुधन में मेरे पास 3 गाय और 2 भैंस है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 8 किलो दुग्ध 50 रूपए प्रति लीटर की दर से डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। इससे पशुपालन का खर्च निकल जाता है। वहीं, थोड़ी बहुत बचत मिल जाती है। पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग में ले रहा हॅू। वर्मी खाद की एक बेड मेरे पास है।
स्टोरी इनपुट: सुरेन्द्र हरितवाल, कृषि विभाग, झोटवाड़ा, जयपु