पशुओं में थनैला बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय
(सभी तस्वीरें- हलधर)पशुओं में थनैला बीमारी जानलेवा के साथ-साथ काफी खर्चीली है, तभी एनिमल एक्सपर्ट भी बताते हैं कि थनैला का इलाज से बेहतर बचाव है और पशुओं को इससे बचाने के एक नहीं कई तरीके हैं। तो चलिए जानते हैं कि पशु में थनैला के लक्षण, इससे बचने के तरीके।
थनैला बीमारी के लक्षण पशुओं के दूध में ज्यादा दिखाई देते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर उसकी जांच कराएं और दूध के सैम्पल को लैब में भेजे, लेकिन सैंपल कैसे लिया जाए, तरीका कैसा होना चाहिए।
दूध के साथ-साथ पशुओं के थन में भी लक्षण दिखाई देते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, थनैला बीमारी मौसमी संक्रमण से कम और पशुपालक की ओर से साफ-सफाई में लापरवाही से नजर आती है। जब भी पशुपालक पशुओं को दूध दुहाते समय सफाई नहीं बरतते हैं तो थनैला होने की आशंका बढ़ने लगती है।
ऐसे लें थनैला का सैंपल
एनिमल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लैब में दूध के सैंपल देने के लिए चार नई पैकेट में सील सिरिंज खरीदे। थनों को अच्छे से साफ करें, हाथों को अच्छे से धुलें फिर सिरिंज के पैकेट को खोलकर पीछे से प्लंजर निकाले और अलग-अलग थनों के बीच की धार के दूध का सैंपल अलग-अलग सिरिंज में सीधे भरे और सिरिंज को बंद कर दें। ध्यान रखे कि दूध का सैंपल थनों से सीधे सिरिंज में डालना है।