पशुओं के गोबर से बायोगैस-खाद, महिला किसान की आय हुई 7 लाख सालाना

नई दिल्ली 23-Mar-2026 05:05 PM

पशुओं के गोबर से बायोगैस-खाद, महिला किसान की आय हुई 7 लाख सालाना

(सभी तस्वीरें- हलधर)

ईशरोल। प्रदेश में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर को लेकर हो हल्ला मचा हुआ है। हर कोई गैस एंजेसी की ओर दौड़ रहा है। सरकार भी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने की कवायद में जुटी हुई है। लेकिन, इस माहौल में भी ग्रामीण राजस्थान के वाशिन्दे बेफि क्रे  बने हुए है। ईंधन की आपूर्ति के लिए ना तो यह पेड काट रहे है और ना ही, सिलेंडर की लाइन में लग रहे है। फिर भी गैस पर रोटी सेक रहे है। अब सोच रहे होंगे कैसे? तो इसका जवाब है गोरब गैस संयंत्र। जिससे ईंधन आपूर्ति तो संभव है ही। साथ ही साथ जैविक और प्राकृतिक रूप से तैयार खाद भी मिलती है। इसी का उदाहरण है महिला कृषक ईमरती देवी। जो पशुधन से प्राप्त गोबर का उपयोग गोबर गैस बनाने में कर रही है। वहीं, संयंत्र से निकलने वाली स्लरी का उपयोग खेतों में जैविक खाद के रूप में कर रही है। किसान ईमरती देवी ने हलधर टाइम्स को बताया कि मेरे पास पशुधन में दो गाय और दो भैंस है। प्रतिदिन 80-90 किलो गोबर का उत्पादन मिल रहा है।  गोबर और पानी का घोल बनाकर प्लांट में डाला जाता है जिससे बनने वाली गैस से रोजाना करीब 7 से 8 घंटे तक चूल्हा जलता है। इस गैस से घर का खाना बनाने के साथ-साथ मवेशियों का चारा पकाने में भी मदद मिलती है। वहीं, एलपीजी सिलेंडर पर होने वाला खर्च लगभग खत्म हो गया है। 

खेतों को मिल रही जैविक खाद

बायोगैस बनने के बाद जो घोल बचता है उसे सलरी कहा जाता है। इसे खेतों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करती हॅू। इससे यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खाद की जरूरत कम हो गई है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। वही, मृदा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिल रहा है। वहीं, पशुधन से मिलने वाला दुग्ध घर में काम आने के साथ-साथ मासिक चार-पांच हजार की बचत दे रहा है। 

इन फसलों का उत्पादन

उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का उपयोग पहले भी खेतों में कम करते थे। लेकिन, बायागैस संयंत्र लगाने के बाद से रासायनिक खाद का उपयोग करीब-करीब बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में जीरा, सरसों, ईसबगोल, बाजरी, मूंग का उत्पादन लेती हॅू। इन फसलों से सालाना 6-7 लाख रूपए की बचत 50 बीघा जमीन से हो जाती है। सिंचाई के लिए मेरे पास ट्यूबवैल है। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. रावताराम भाखर, पशुपालन विभाग, बाड़मे


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हाईटेक से निकली समृद्धि की धार, आमदनी 13 लाख पार

कहते हैं जज्बे के आगे बड़ी से बड़ी मुश्किल बौनी हो जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है किसान शिवप्रकाश नागर ने। हाईटेक खेती से जुड़कर शिवप्रकाश 6-7 लाख रूपए सालाना का शुद्ध लाभ कमा रहा है। इसके अलावा मैदानी सब्जी फसल, स्ट्रॉबेरी और स्वीटकॉर्न के उत्पादन से भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे है। इससे खेती से सालाना सकल आय का आंकड़ा 13-14 लाख रूपए के करीब पहुंच चुका हॅू। जबकि, वर्ष 2018 से पहले तक किसान शिव प्रकाश को परम्परागत फसलों के उत्पादन से सालाना ढ़ाई से तीन लाख रूपए की आमदनी मिलती थी। उनका कहना है कि किसान भ्रमण कार्यक्रम ने खेती को नई दिशा देने का काम किया है। मोबाइल 84325-61316