आईआईएमआर ने महिला किसानों को दी उन्नत तकनीकों की जानकारी

नई दिल्ली 09-Mar-2026 01:34 PM

आईआईएमआर ने महिला किसानों को दी उन्नत तकनीकों की जानकारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (IIMR), लुधियाना द्वारा “एथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्रों में मक्का उत्पादन में वृद्धि परियोजना” के तहत विश्व महिला दिवस के अवसर पर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में मक्का पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से वित्त पोषित द्वारा था। कार्यक्रम चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार ब्लॉक के जयसिंहपुरा गांव में आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य महिला किसानों को मक्का की उन्नत खेती, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) की आधुनिक तकनीकों की जानकारी देना था। इस कार्यक्रम में 20 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कृषि में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) एवं उपनिदेशक उद्यान डॉ. शंकर लाल जाट ने महिलाओं को कृषि कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाएं खेती में महत्वपूर्ण योगदान देकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दे सकती हैं।

मक्का से आय बढ़ाने के बताए तरीके

कार्यक्रम में आईआईएमआर की ओर से चित्तौड़गढ़ जिले में कार्यरत यंग प्रोफेशनल शंकर लाल चौधरी ने महिलाओं को मक्का की उन्नत खेती तकनीकों, कृषि में महिलाओं की भागीदारी और मक्का के माध्यम से आय बढ़ाने के विभिन्न उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।


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खेती की कमाई से बेटे को बनाया मास्टर, महिलाओं की बदली जीवन रेखा

सफलता की यह कहानी है रेखा देवी मिश्रा की। जिन्होंने झोपड़ी में रहते हुए अपने गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्ती भूमिका निभाई। वहीं, खेती, पशुपालन में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। पशु सखी के रूप में राज्य सरकार ने इनको उत्कृष्ट सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया है। रेखा देवी का कहना है कि लखनऊ से 10 दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जीवन को नई दिशा मिली। इसी का परिणाम है कि खेती और पशुपालन के बिना अब दिन गुजरता नहीं है। यूँ समझों, पशुपालन से जुडऩे के बाद मुझे उड़ान के लिए नये पंख मिल गए है। गौरतलब है कि रेखा पशुओं के वैक्सीनेशन से लेकर पशु उपचार से जुड़ी कई हर्बल दवाएं स्वयं तैयार करती है। उन्होने बताया कि खेती सम्बद्ध कार्यो से सालाना 5-7 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। मोबाइल 77338-47325