मॉर्डन फार्म कर देगा हैरान, डेयरी में कल्याणी की उड़ान
(सभी तस्वीरें- हलधर)
मोरजंड खारी, श्रीगंगानगर। डेयरी फार्म तो आपने कई देखें होंगे। लेकिन, ये डेयरी फार्म जरा हटके है। यहां पर पशुओं को डायट चार्ट के हिसाब से आहार खिलाया जाता है। वहीं, किसी बाहरी का फार्म में प्रवेश बंद है। यानी, बायो सैफ्टी प्रोटॉकाल का भी पूरा पालन किया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि इस फार्म के पास देसी-विदेशी गाय नस्लों की अपनी ब्रिड़ लाइन है। प्रतिदिन करीब 700 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। गौरतलब है कि इस मॉर्डन डेयरी फार्म को कोई कंपनी नहीं, बल्कि, स्नातकोत्तर पास महिला पशुपालक कल्याणी संचालित कर रही है। उनका कहना है कि 5 साल पहले 9 पशुओं के साथ डेयरी फार्म शुरू किया। वर्तमान में पशुओं की संख्या 90 के करीब है। इससे सारा खर्च निकालने के बाद सालाना 18 लाख रूपए का लाभ मिल रहा है। महिला पशुपालक कल्याणी ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार पहले खेती तक ही सीमित था। दुग्ध आपूर्ति के लिए एक-दो पशु रखते थे। लेकिन, दुग्ध की मांग को पहचानते हुए डेयरी को व्यावसायिक रूप देने का मन बनाया। इस कार्य में परिजनों का सहयोग भी मुझे मिला। इसी का परिणाम है कि सीएमआर मिल्क प्रॉडक्शन अपने नाम कई रिकॉर्ड बना चुका है। बात चाहे नस्ल सुधार, वैक्सीनेशन की हो, ब्रिड़ लाइन अथवा फिर दुग्ध उत्पादन की, कई पुरस्कार अब तक मिल चुके है। उन्होंने बताया कि 9 पशुओं के साथ डेयरी का काम शुरू किया। अनुभव बढ़ा तो वर्ष 2020 में पशुपालन को व्यवसाय का रूप दिया। उन्होंने बताया कि परिवार के पास 15 बीघा जमीन है। इसमें गेहूं, जौ, चना, सरसों, मूंग, ग्वार और कपास की फसल लेती हॅू। इससे सालाना दो से तीन लाख रुपये की बचत मिल जाती है। इसके अलावा पशुओं के लिए मक्का का उत्पादन लिया जा रहा है। इससे साईलेज तैयार करके गायों को खिलाया जा रहा है।
उन्होने बताया कि वर्तमान में गायों की संख्या 90 है। पिछले साल लेबर समस्या से चलते कई गायों की बिक्री करनी पड़ी। उन्होने बताया कि वर्तमान में 28 गायों से दूध उत्पादन मिल रहा है। प्रतिदिन 680 से 690 लीटर दूध का उत्पादन मिल रहा है। दूग्ध बिक्री के लिए आउटलेट खोला हुआ है। उन्होंने बताया कि दुग्ध दोहन मशीन से किया जा रहा है। पशु स्वास्थ्य को देखते हुए फार्म में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश बंद है।
उन्होने बताया कि फार्म पर अत्याधुनिक तकनीकी सुविधा आयातित सेक्सड सीमन, रेपिड़् प्रेग्रेसीं टेस्ट किट, सीएमटी टेस्ट आदि का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, बेंचमार्क और एसओपी पर फोकस करते हुए स्वदेसी गौ नस्ल गिर, थारपारकर, कांकरेज, विदेशी नस्ल एचएफ, जर्सी की 100 प्रतिशत प्योर ब्लड़ लाइन की गाय और बछिया तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पशु आवास भी वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया हुआ है। पशुओं के लिए प्राकृतिक आवास भी तैयार किया हुआ है। मौसम के आधार पर पशु के रखरखाव का पूरा ध्यान रखा जाता है। वहीं, प्रतिदिन डायट चार्ट के हिसाब से पशुओं को संतुलित आहार दिया जाता है। साथ ही, समय-समय पर वैक्सीनेशन करवाया जाता है। कैटल शैड में पंखा और फोगर लगे हुए है।