खारे पानी में उपजाया भगवा, आय बढक़र 12 लाख

नई दिल्ली 17-Feb-2026 01:13 PM

खारे पानी में उपजाया भगवा, आय बढक़र 12 लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

खारावाला, बाड़मेर। अनार की खेती ने आय की तस्वीर बदलकर रख दी। पहले लवणीय पानी से परम्परात फसलों का उत्पादन में भी दिक्कत आती थी। लेकिन, अनार की खेती से जुडऩे के बाद अब सारी परेशानी दूर हो चुकी है। साथ ही, आय का आंकड़ा बढक़र 12 लाख रूपए तक पहुंच चुका है। यह कहना है किसान अशोक कुमार ज्याणी का। जो फार्मेसी की पढ़ाई के साथ-साथ खेती भी कर रहे है। किसान अशोक कुमार ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 16 बीघा कृषि भूमि है। उन्होने बताया कि आठ साल पहले तक परम्परागत फसलों से होने वाली आय से ही परिवार की रहगुजर चलती थी। लेकिन, अनार की खेती ने आमदनी की तस्वीर और परिवार की तकदीर बदलने का काम किया। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए ट्यूबवैल है। लेकिन, पानी लवणीय होने के चलते केवल बरसाती फसलों का ही उत्पादन मिल पाता था। चाहकर भी दूसरी फसलो का उत्पादन नहीं ले पाते थे। इस स्थिति को देखते हुए अनार की खेती को अपनाया। परिणाम सबके सामने है। उन्होंने बताया कि पिछले साल अनार की फसल से 12 लाख रूपए की आय हुई है। जिसमें शुद्ध लाख करीब 9 लाख रूपए रहा है। आय का यह आंकड़ा परम्परागत फसलों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। 

परम्परात से डेढ़ लाख

उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की बचत मिल रही है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में बाजरा, ग्वार और अरंड़ी का उत्पादन लेता हॅू। पानी की समस्या के चलते रबी-खरीफ की दूसरी फसलो का उत्पादन खेत में नहीं हो पाता है। उन्होंने बताया कि अनार फसल में बूंद-बूंद सिंचाई का उपयोग कर रहा हूूॅ। वहीं, विद्युत बचत के लिए सोलर पंप लगाया हुआ है।

घी उत्पादन से भी आय

पशुधन में मेरे पास 4 गाय और छोटे पशु शामिल है। प्रतिदिन 20-25 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। उन्होंने बताया कि दुग्ध की बिक्री नहीं करते है। घरेलू आवश्यकता पूर्ति के बाद शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार करते है। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। वहीं, सालाना 70-80 हजार रूपए की बचत मिल जाती है।  पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग कर रहा हॅू।

स्टोरी इनपुट: बुद्धाराम मोरवाल, श्याम दास(केवीके दांता)
डॉ. रावताराम भाखर, पशुपालन विभाग-बाड़मे


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