परिवार की लक्ष्मी बनी चंदा, घर बैठे कमाई ढाई लाख

नई दिल्ली 29-Oct-2025 01:55 PM

परिवार की लक्ष्मी बनी चंदा, घर बैठे कमाई ढाई लाख

(सभी तस्वीरें- हलधर)

कहते है बहू घर की लक्ष्मी होती है। इस बात को धरातल देने वाली महिला किसान है चंदा देवी मीणा। जो परिवार की आर्थिकी सुधार कर परिवार के बीच लक्ष्मी का दर्जा प्राप्त कर चुकी है। चंदा देवी का कहना है कि पहले खेती से ही आमदनी होती थी। लेकिन, अब सिलाई, पशुपालन और मुर्गीपालन से भी आय मिलने लगी है। खेती के अतिरिक्त इन कामों से सालाना दो से ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी हो जाती है। मोबाइल 7568581489

रात्याखेड़ा, भीलवाड़ा। घर में बहू को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। लेकिन, यह बात वर्तमान में बहू में गुणों पर निर्भर करती है। यदि बहू गुणकारी है तो चंदा देवी मीणा के जैसे परिवार की चहेती बन जाती है। जिसने अपने श्रम और हुनर से परिवार की आर्थिकी को नया रूप देने का काम किया है। इसके चलते अब घर बैठे सालाना ढ़ाई लाख रूपए की आमदनी खेती के अतिरिक्त परिवार को मिलने लगी है। महिला कृषक चंदा देवी ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास महज 4 बीघा कृषि भूमि है। उन्होने बताया कि पहले तो खेती से मिलने वाली आय से परिवार का गुजारा चल जाता था। लेकिन, समय के साथ बढ़ी जिम्मेदारियों से खेती से होने वाली आय कम लगने लगी। इसके चलते मैं भी परिवार की आर्थिकी में हाथ बंटाने के लिए तैयार हुई। उन्होने बताया कि हाथों को हुनरमंद बनाने का काम किया कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा ने। जिन्होने टीएसपी योजना का लाभ देकर मुझे घर बैठे परिवार की आमदनी बढाने लायक बना दिया। उन्होंने बताया कि केन्द्र से सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद पशुपालन और मुर्गीपालन से भी जुड़ गई। जिससे परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। उन्होने बताया कि सिंचाई के लिए एक कुआं है और मक्का, उड़द, चना और गेहूं का उत्पादन जमीन में होता है। इससे लाख से सवा लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
सिलाई से 50 हजार
उन्होने बताया कि केवीके से सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण लेने के बाद स्वयं का उद्यम शुरू किया। समय के साथ गांव की महिलाओं से जुड़ाव बढ़ता रहा और उद्यम चल निकला। अब सिलाई उद्यम से सालाना 50 हजार रूपए की आय मिल रही है।
किचन गार्डन भी
उन्होने बताया कि किचन गार्डन में 10 नींबू, 4 अमरूद के पौधेें लगे है। वहीं, मिर्च, बैंगन, टमाटर, लौकी, तुरई जैसी सब्जी फसलों का उत्पादन लेती हॅू। इससे भी आर्थिक बचत हो रही है।
पशुपालन और मुर्गीपालन
उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 4 भैंस है। प्रतिदिन 12 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। इसमें से 9 लीटर दुग्ध का विपणन 55 रूपए प्रति किलो की दर से कर रही हॅू। इससे सालाना लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। वहीं, मुर्गीपालन में प्रतापधन नस्ल की 50 मुर्गियां मेरे पास है। इससे भी 35-40 हजार रूपए सालाना की आय मिल जाती है।
स्टोरी इनपुट: डॉ. सीएम यादव, अनिता यादव, केवीके, भीलवाड़ा