300 रुपए मजदूर बना हाईटेक किसान, खीरे से लाखों की कमाई

नई दिल्ली 02-Jan-2026 12:08 PM

300 रुपए मजदूर बना हाईटेक किसान, खीरे से लाखों की कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नगवाड़ा, डीडवाना-कुचामन। हाथों को मेहनत की आदत हो तो आसमान को भी झुकाया जा सकता है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है किसान विकास कुमार ने। जो कल तक 300 रूपए दिहाड़ी के हिसाब से पॉली हाउस में मजदूरी करते थे। लेकिन, अब एक शैडनेट और एक पॉलीहाउस के मालिक है। किसान विकास की माने तो संरक्षित खेती के बाद शुरूआती आय लाखों में मिल रही है। अब तक चार लाख रूपए की आमदनी खीरे की फसल से मिल चुकी है। वहीं, ओपन फील्ड सब्जियों से आमदनी मिलना शेष है। किसान विकास ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास दो एकड़ जमीन है। पहले परिजन परम्परागत फसल उत्पादन तक सीमित रहे। इस कारण आमदनी का आंकड़ा भी ठिठका रहा। हालात ये थे कि घर खर्च चलाने के लिए भी दूसरा काम करना पड़ता था। लेकिन, हाईटेक खेती से मिल रही आय को देखते हुए लग रहा है कि परिवार के अच्छे दिन आ गए। गौरतलब है कि विकास ने 12वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी और रोजगार के लिए कृषि मजदूर बन गए। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस मेें 300 रूपए दिहाड़ी के हिसाब से चार-पांच साल मजदूरी की। लेकिन, इस दौरान संरक्षित फसल का गणित समझ आ गया। स्वयं को हाइटेक खेती से जोडऩे के लिए परिजनो को राजी किया। इसके बाद उद्यानिकी विभाग की अनुदान योजना का लाभ उठाते हुए 4 हजार वर्ग मीटर में एक शैडनेट और दो हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में एक पॉली हाउस स्थापित करवाया। परिणाम रहा है कि अब दोनों ही संरक्षित संरचना में खीरा फसल का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के लिए मेरे पास दो ट्यूबवैल है और परम्परागत फसलों में मूंगफली, ग्वार, गेहूं का उत्पादन लेता हॅू। इन फसलों से सालाना तीन से चार लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

4 लाख की आय

उन्होंने बताया कि संरक्षित खेती की शुरूआत खीरा फसल से हुई है। खीरे का उत्पादन जारी है और अब तक 4 लाख रूपए की आमदनी मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि पॉली हाउस में अगेती खरबूजा की फसल भी ली जा सकती है। हाथों से परागण करके अगेती फसल का उत्पादन लिया जा सकता है। वहीं, लौकी का उत्पादन भी बेहत्तर मिलता है। 

सब्जी फसल का उत्पादन

उन्होने बताया कि पॉली हाउस का गणित समझ आने के बाद अब ओपन फील्ड में भी सब्जी फसलो का उत्पादन ले रहा हॅॅू। ओपन फील्ड में प्याज, टिंड़ा, बैंगन और लहसुन की फसल लगाई है। हालांकि, इन फसलों से लाभ का आंकड़ा निकलना अभी बाकी है। 

पशुधन से आय

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और आधा दर्जन से ज्यादा बकरियां है। उन्होंने बताया कि दुग्ध घर में काम आ जाता है। वहीं, बकरियों से सालाना 40-50 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हॅू। 


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कहते है कि परिवार के आर्थिक हालात ठीक नही हो तो सफलता के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। किसान औंकारमल मेघवाल के साथ भी यही हुआ है। औंकार ने बताया कि पहले खेतों से पैदावार कम मिलती थी। इससे परिवार का खर्च निकालना भी मुश्किल लगता था। मजबूरी में रोटी-रोटी की तलाश ने मुझे दुबई पहुंचा दिया। आठ साल में जो कमाया, यहां लौटकर खेतों में निवेश किया। इसी का परिणाम है कि अब खेतों से 10-12 लाख रूपए सालाना की आमदनी मिल रही है। गौरतलब है कि किसान औकारमल डेढ़ दशक से सब्जी फसलो की खेती कर रहे है। साथ ही, इन्होने प्रति बीघा परम्परागत फसलों का उत्पादन बढ़ाने में भी सफलता पाई है। मोबाइल 9983231901