5वीं पास किसान भैरूलाल ने ब्लूबेरी-रसभरी से लिखी समृद्धि की कहानी

नई दिल्ली 06-Nov-2025 01:56 PM

5वीं पास किसान भैरूलाल ने ब्लूबेरी-रसभरी से लिखी समृद्धि की कहानी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

खेती के आधुनिक तौर-तरीके के दम पर बदलाव की कहानी लिखने वाला यह किसान है भैरूलाल भोई। जो भले ही ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। लेकिन, खेतों को प्रयोगशाला के रूप में तैयार किया है। इसी का परिणाम है कि 5वीं पास भैरूलाल ब्लूबेरी, रसभरी और स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसलों का उत्पादन ले रहा है। साथ ही, सब्जी उत्पादन से सालाना आमदनी का आंकड़ा 4 लाख रूपए तक पहुंचा चुका है। मोबाइल 99284-83227 

बस्सी, चित्तौडग़ढ़। खेती से लाभ के लिए पढ़ाई से ज्यादा आपकी सोच मायने रखती है। क्योंकि, सोच ही आपको खेतों को प्रयोगशाला बनाने के लिए मजबूर किए रखती है। ऐसे ही किसान है भैरूलाल भोई। जो भले ही 5वीं पास है। लेकिन, खेतों में ब्लूबेरी, रसभरी और स्ट्रॉबेरी का उत्पादन ले चुके है। साथ ही, सब्जी फसलों से अपनी आय बढ़ा रहे है। किसान भैरूलाल का कहना है कि खेतों का प्रयोगशाला बनाने से आय का आंकड़ा 4 लाख रूपए सालाना तक पहुंच चुका है। किसान भैरूलाल ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार में पास महज 2 एकड़ जमीन है। जमीन के इस टुकडे से लाभ कमाने की कल्पना भी बेमानी है। लेकिन, फिर भी मैं प्रयास कर रहा हॅू और सफलता भी मिल रही है। उन्होने बताया कि आय का आंकड़ा बढाने के लिए ब्लूबेरी, रसभरी और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलो का उत्पादन ले चुका हॅू। उन्होने बताया कि ब्लूबेरी की फसल से आधा बीघा क्षेत्र में 40-50 हजार रूपए की आमदनी हो जाती है। गौरतलब है कि किसान भैरूलाल ने तीन एकड़ जमीन लीज पर ली हुई है। इससे परिवार की आर्थिक समृद्धि बढाने में मदद मिल रही है। उन्होने बताा कि सिंचाई के लिए मेरे पास कुआं है और जल बचत केलिए बूंद-बंूद सिंचाई का उपयोग कर रहा हॅू। परम्परागत फसल में मक्का, गेहूं, मूंगफली का उत्पादन लेता हॅू। किसान भैरूलाल का कहनाहै कि छोटी जोत रखने वाले किसान समन्वित पद्धति से खेती करके किसान अपने लाभ को बढ़ा सकते है।


सब्जी से निकलता है घर खर्च
उन्होंने बताया कि एक बीघा क्षेत्र में सब्जी फसल का उत्पादन लेता हॅू। सब्जी फसल में भिंड़ी, टमाटर, मिर्च, करेला, लौकी, तुरई, खरबूज, मटर सहित दूसरी सब्जी फसल शामिल है। उन्होंने बताया कि सब्जी फसल के उत्पादन से परिवार का सालाना खर्च निकल जाता है। इसके अलावा खेतों में फलदार पौधेें भी लगाएं हुए है। हालांकि, अभी इनसे उत्पादन मिलना शेष है। इन फसलो के उत्पादन से सालाना 4 लाख रूपए तक आय मिल जाती है। 


पशुपालन से भी आय
उन्होने बताया कि पशुपालन भी परिवार की आर्थिकी को संवार रहा है। पशुधन में मेरे पास दो गाय है। प्रतिदिन 5-6 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिलता है। इसमें से एक समय का दुग्ध स्थानीय स्तर पर ही बिक्री कर देता हॅू। वहीं, पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हॅू। 


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