युद्ध और कमजोर मॉनसून का डबल अटैक! खरीफ सीजन पर मंडरा रहा बड़ा संकट
(सभी तस्वीरें- हलधर)बढ़ती वैश्विक तनातनी और मौसम की मार से किसानों की चिंता बढ़ी, देश में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले ही किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर खाद, डीजल और कृषि उपकरणों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कमजोर मॉनसून की आशंका ने खेती की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर अच्छी बारिश नहीं हुई तो इस साल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
डीजल-खाद महंगे, लागत बढ़ने का खतरा
वैश्विक संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर डीजल और परिवहन खर्च पर पड़ रहा है। किसानों को पहले ही महंगे बीज और उर्वरकों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में लागत बढ़ने से खेती और मुश्किल हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहे तो खाद की सप्लाई और कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
कमजोर मॉनसून से सूखे का डर
मौसम विभाग की शुरुआती रिपोर्ट में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है। खासकर वर्षा आधारित खेती वाले इलाकों में किसानों की चिंता बढ़ गई है। कमजोर मॉनसून का सबसे ज्यादा असर धान, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।
किसानों की उम्मीदें सरकार पर टिकी
किसान संगठनों ने सरकार से डीजल और खाद पर राहत देने की मांग की है। साथ ही सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने और फसल बीमा दावों के त्वरित निपटारे की भी मांग उठ रही है। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते मदद नहीं मिली तो इस बार खरीफ सीजन आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।
बाजार में बढ़ सकती है महंगाई
यदि खरीफ उत्पादन प्रभावित होता है तो आने वाले महीनों में खाद्यान्न और सब्जियों की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। इससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और किसानों को मिलकर रणनीति बनानी होगी ताकि संभावित संकट को कम किया जा सके।