विदेश से लौटकर शुरू किया पशुपालन, अब सालाना इनकम 12 लाख से ज्यादा
(सभी तस्वीरें- हलधर)
माचेड़ा, राजसमंद। यदि कुछ करने का जज्बा है तो पढ़ाई ज्यादा मायने नहीं रखती है। 8वीं पास भवानी पालीवाल परिवार के भरण-पोषण के लिए 13 साल वतन से दूर रहे। लेकिन, अब पशुपालन से मासिक 70 हजार रूपए की बचत ले रहे है। साथ ही, खेतों में कृषि नवाचार का रंग भर रहे है। इन नवाचारों में फल-सब्जी उत्पादन के साथ-साथ मधुमक्खीपालन शामिल है। हालांकि, अभी इन गतिविधियों से आय नहीं मिली है। लेकिन, सुखद कल की उम्मीद जग चुकी है। किसान भवानी ने हलधर टाइम्स को बताया कि पहले परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। रोजी-रोटी और बेहत्तर आय की तलाश मुझे वतन से दूर ले गई। करीब 13 साल देश से बाहर रहा। चार साल पहले ही घर लौटा हॅू। इसके बाद जमा पूंजी से खेतों में नवाचार का रंग भरना शुरू किया है। ताकि, फिर पहले जैसे दिन ना देखने पड़े। बता दें कि किसान भवानी के पास 10 बीघा जमीन है और सिंचाई के लिए कुआं, एक ट्यूबवैल है। विद्युत बचत के लिए सौर उर्जा पंप लगाया हुआ है। उन्होंने बताया कि आधा दर्जन पशुओं के सहारे दुग्ध विपणन का काम शुरू किया। पहले ही महीने, नौकरी से ज्यादा बचत मिली तो मेरा हौसला बढ़ गया। उन्होंने बताया कि इसके बाद कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। जैसे-जैसे डेयरी व्यवसाय में बचत मिलती गई, उन्नत नस्ल के पशुधन की खरीद करता रहा। इससे समय के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन का आंकड़ा भी बढ़ता रहा। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, सरसों, मक्का, चंवला, मूँग, रिजका, गन्ना का उत्पादन ले रहा हॅू। खर्चा निकालकर परम्परागत फसलों से 4-5 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है।
प्रतिदिन 125 लीटर दुग्ध का उत्पादन
उन्होंने बताया कि खेती से ज्यादा पशुपालन मेरे लिए लाभकारी साबित हो रहा है। इस कार्य से जुड़े हुए चार हो चुके है। वर्तमान में 14 गाय और 5 भैंस है। प्रतिदिन 100-125 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। गायों का दुग्ध 32 रूपए और भैंस का दुग्ध 50 रूपए प्रति लीटर की दर से डेयरी को बिक्री कर रहा हॅू। इससे खर्चा निकालने के बाद मासिक 70 हजार रूपए की बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि हर माह पशु स्वास्थ्य की जांच पशु चिकित्सकों से करवा रहा हॅू। दुग्ध का रिकॉर्ड भी रख रहा हॅू। इससे पशु की नब्ज जल्द ही पकड़ में आ जाती है।
स्थापित किया बगीचा
उन्होंने बताया कि टिकाऊ आय के लिए एक एकड़ क्षेत्र में आम और आंवले का बगीचा स्थापित किया है। आम से इस साल आमदनी मिलना शुरू हो जायेगी। जबकि, आंवले का बगीचा अभी दो साल का हुआ है। उन्होंने बताया कि बगीचे का खर्च निकालने के लिए लौकी, भिंड़ी और ग्वार की फसल ले रहा हॅू। वहीं, मोरिंगा के पौधें लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।