रिटायरमेंट के बाद किसान ने किया कमाल, मशरूम से मोटी कमाई

नई दिल्ली 27-Jan-2026 03:27 PM

रिटायरमेंट के बाद किसान ने किया कमाल, मशरूम से मोटी कमाई

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अमरोहा, उत्तरप्रदेश। रिटायरमेंट के बाद किसानों को कम लागत वाले उद्यम की नई राह दिखाने वाले किसान है गुलाब सिंह चौधरी, जो परम्परागत खेती के साथ-साथ बटन मशरूम का उत्पादन ले रहे है। उनका कहना है कि मुझे तो पेंशन मिल रही है। जीवन आराम से गुजर सकता है। लेकिन, मेरे अनुभव से दूसरे किसानों का जीवन संवरता है तो इसमें दिक्कत क्या है। इसी सोच के साथ मैने मशरूम यूनिट लगाई है। ताकि, मेरे गांव सहित आस-पास के किसानों को आय बढाने का नया जरिया मिल सके। गौरतलब है कि किसान गुलाब सिंह बटन के 250 बैग से अब तक सवा दो क्विंटल मशरूम का उत्पादन ले चुके है। साथ ही, 22 हजार से अधिक की अतिरिक्त आय प्राप्त कर चुके है। जबकि, खेती से सालाना 8 लाख रूपए की आमदनी ले रहे है। किसान गुलाब सिंह ने हलधर टाइम्स को बताया कि नौकरी के दौरान मेरा अधिकांश समय किसानों की सेवा में गुजरा। रिटायरमेंट के बाद अपने पैतृक गांव अमरोहा लौट आया। अपने को व्यस्त रखने के लिए मैने बटन मशरूम को चुना। क्योंकि, खेती में फसल बुवाई के बाद समय-समय पर देखरेख की जरूरत होती है। लेकिन, मशरूम से आपका मार्केट लिंके ज बढता है। इसी सोच के साथ 250 बैग के सहारे बटन मशरूम का उत्पादन लेना शुरू किया। उन्होंने बताया कि अब तक सवा दो क्विंटल बटन मशरूम का उत्पादन मिल चुका है। इससे करीब 22 हजार रूपए से ज्यादा की आमदनी मिल चुकी है। घर से ही उत्पादित मशरूम 100 रूपए प्रति किलो थोक भाव से बिक्री हो रहा है। उन्होंने बताया कि मशरूम से हो रही आमदनी को देखते हुए अब गांव के जानकार इसके बारे में पूछ परख कर रहे है। इससे उम्मीद है कि आगामी सीजन में गांव में नए मशरूम उत्पादक तैयार होंगे। उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं और गन्ना का उत्पादन ले रहा हॅू। करीब 40 बीघा भूमि मेरे पास है। इससे सालाना करीब 8 लाख रूपए की आमदनी मिल जाती है। 

लगाया ड्रेगन का बगीचा

उन्होने बताया कि मशरूम के साथ-साथ ड्रेगन फ्रूट और राजमा की खेती का भी श्री गणेश किया है। डे्रगन के 324 पौधें खेत में लगाए है। पौधों से बेहत्तर उत्पादन की उम्मीद बंधी है। क्योंकि, रोपाई के थोडे दिनों बाद ही पौधों से 400-400 ग्राम के दो फल मिले है। वहीं, राजमा की बाजार में अच्छी मांग है। 

उन्नत पशुपालन

उन्होंने बताया कि पशुधन में मेरे पास 2 गाय और 2 भैंस है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने बताया कि दुग्ध की खपत घर में हो जाती है। वहीं, शेष रहने वाले दुग्ध से घी तैयार कर लेता हॅू। इससे पशुधन का खर्च निकल जाता है। जबकि, पशु अपशिष्ट खेतों में काम आ जाता है। 

स्टोरीइनपुट: एसएन चौधरी, आईएचआईटीसी, जयपुर


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