रंगीन आलू से किसान की कमाई 11 लाख सालाना तक

नई दिल्ली 02-Feb-2026 04:52 PM

रंगीन आलू से किसान की कमाई 11 लाख सालाना तक

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अर्जुनपुरा, कोटा। लैब की रिसर्च से लैंड का रंग बदलने वाले किसान है सतीश पंवार, जो अपने रंग-बिरंगे आलू से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी रूबरू करवा चुके है। उनका कहना है कि रंगीन आलू के बाजार में दाम ज्यादा मिलते है। साथही, यें एंटी ऑक्सीडेट से भरपूर होने के साथ-साथ एंटी कैंसर का गुण भी रखते है। गौरतलब है कि कृषि विश्वविद्यालय पर नेटवर्क परियोजना के तहत आलू की विभिन्न किस्मों पर परीक्षण किया जा रहा हैे। इसका सीधा लाभ किसानों को भी मिलने लगा है। किसान सतीश का कहना है कि रंगीन आलू की खेती का विचार वैज्ञानिक रिसर्च देखने के बाद ही मन में आया। गौरतलब है कि सतीश आलू की खेती से सालाना 7 लाख रूपए की आय प्राप्त कर रहे है। जबकि, ख्ेाती से सकल आय का आंकड़ा 11 लाख रूपए के करीब है।  किसान सतीश ने हलधर टाइम्स को बताया कि वर्ष 2017 में बीटेक करने के बाद दो-तीन साल नौकरी की। कोविड पॉजीटिव होने के कारण जॉब छोडक़र घर लौट आया। स्वस्थ होने के बाद घर पर रहकर ही कुछ करने की ठानी। परिवार के पास 12 बीघा जमीन है। इस स्थिति को देखते हुए तकनीक आधारित खेती की ओर कदम बढ़ाएं। आज परिणाम सबके सामने है। उन्होंने बताया कि तकनीक आधारित खेती के लिए कृषि विश्वविद्यालय कोटा के कृषि वैज्ञानिको ने भी हौंसला बढ़ाया। समय के साथ ज्यादा मुनाफा देने वाला फसल चक्र तैयार किया और यही परिवार की समृद्धि का आधार बन गया। उन्होंने बताया कि अब खेती में बरसात के मौसम को छोडक़र सालभर सब्जी फसलों का ही उत्पादन हो रहा है। 

रंगीन आलू से ज्यादा पैदावार

उन्होंने बताया कि रबी में साढे 12 बीघा जमीन में आलू की उन्नत किस्मों की बुवाई करता हॅू। इससे प्रति बीघा 45-50 हजार रूपए तक बचत मिल जाती है। उन्होंने बताया कि रंगीन आलू किस्मों में कुफरी जामुनी, नीलकंठ, उदय, मणिक आदि किस्में शामिल है। उन्होने बताया कि लाल आलू में एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा होता है। जबकि, जामुनी आलू में एट्रोसाइन तत्व पाया जाता है। जो इसे एंटी कैंसर भी बनाता है। उन्होंने बताया कि बाजार में रंगीन आलू 40 रूपए प्रति किलो के भाव बिकता है। जबकि, सफेद आलू थोक में 5 से 7 रूपए के भाव बिक्री होता है। 

लाभकारी जायद सब्जी

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों की सलाह पर शुरू की गई खरबूजें की खेती काफी लाभकारी साबित हो रही है। इसके उत्पादन से प्रति बीघा 25-30 हजार रूपए तक बचत मिल रही है। उन्होने बताया कि खरबूज के अलावा ककड़ी, टमाटर, बैंगन, खीरा, लौकी आदि सब्जी फसलों का उत्पादन लेता हॅू। खरीफ में धान की बुवाई के साथ बैंगन की बुवाई करता हॅू। इससे फसल का खर्च निकल जाता है।

पशुपालन से आय

पशुपालन में 4 गाय और 3 भैंस मेरे पास है। प्रतिदिन 10-15 लीटर दुग्ध को डेयरी को बिक्री कर देता हॅू। शेष दुग्ध घर पर काम आ जाता है।उन्होने बताया कि दुग्ध बिक्री से पशुधन के साथ-साथ परिवार का दैनिक खर्च निकल जाता है। पशु अपशिष्ट से कम्पोस्ट खाद तैयार कर रहा हॅू। 

स्टोरी इनपुट: डॉ. डीएल यादव, एआरएस, कोटा