सरसों की फसल बचाने के अचूक उपाय, झुलसा से तनागलन तक

नई दिल्ली 04-Feb-2026 12:55 PM

सरसों की फसल बचाने के अचूक उपाय, झुलसा से तनागलन तक

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सरसों की फसल पर झुलसा, मृदु रोमिल आसिता, चूर्णिल आसिता एवं तना गलन रोग के लक्षण दिखाई देने पर रोग की रोकथाम के उपाय करें।

  1. झुलसा, काला धब्बा अथवा पर्ण चित्ती रोग: रोकथाम के लिए फसल के 45, 60 और 75 दिन बाद कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत अथवा मैन्कोजेब 50 डब्लू पी अथवा आईप्रोडियान 50 डब्लू पी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव करें।
  2. मृदु रोमिल आसिता/तुलासिता रोग: रोकथाम के लिए मैन्कोजेब 75 डब्लू पी अथवा रिडोमिल एम जेड 72 डब्लू पी 0.2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  3. चूर्णिल आसिता/ छाछ्या रोग: रोग के लक्षण दिखाई देने पर घुलनशील गंधक 80 डब्लू पी 0.2 मिली अथवा डाइनोकैप 48 ईसी 0.1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
  4. तनागलन: रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम 50 डब्लू पी 0.1 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर फूल आने के समय 20 दिन के अन्तराल पर दो छिड़काव करें। (बुवाई के 50 वें और 70 वें दिन पर)।


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