RAS का सपना टूटा, नर्सरी और स्ट्रॉबेरी से 60 लाख कमाए
(सभी तस्वीरें- हलधर)
कोटपूतली-शाहपुरा। स्नातकोत्तर के बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य तय किया। लेकिन, कुछ कारणों से अधूरा रहा। यह कहना है नवीन कुमार यादव का। जो अब नर्सरीमैन के रूप में अपनी पहचान बना चुके है। साथ ही, बागवानी और स्ट्रॉबेरी जैसी नगदी फसलों का उत्पादन ले रहे है। गौरतलब है कि किसान नवीन ने खेती की जिम्मेदारी संभालने के बाद आईसीएआर के अलग-अलग संस्थानों से प्रशिक्षण लिए और अब घर बैठे सालाना 60 लाख रूपए सालाना से अधिक की आय प्राप्त कर है। इस साल 4 बीघा स्ट्रॉबेरी की फसल से 25 लाख रूपए की आय अब तक प्राप्त कर चुके है। किसान नवीन ने हलधर टाइम्स को बताया कि परिवार के पास 6 बीघा जमीन है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई करने के दौरान कभी खेती के बारे में सोचा नहीं था। लेकिन, अब खुश हूूं कि किसान बनकर एक अधिकारी से ज्यादा आमदनी प्राप्त कर रहा हूॅ। उन्होने बताया कि वर्ष 2017 में स्नातकोत्तर के बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य रखा। चार साल तैयारी की। लेकिन, लक्ष्य उम्मीदों से दूर रहा। इसके चलते खेती से जुड़ा। उन्होंने बताया कि खेती की शुरूआत ही बागवानी फसलों से की। मौसमी, संतरा और अमरूद का बगीचा स्थापित किया। ताकि, टिकाऊ आय खेतो से मिलती रहे। उन्होंने बताया कि बगीचा पांच साल का हो चुका है। 5 बीघा क्षेत्र में करीब 750 पौधें तीनों ही फसलों के लगे हुए है। इससे करीब 6 लाख रूपए की आमदनी मिलने लगी है। उन्होने बताया कि एक बीघा जमीन मेें परिवार की आवश्यकता पूर्ति के लिए गेहंू का उत्पादन लेता हॅू।
4 बीघा में स्ट्रॉबेरी
उन्होने बताया कि उद्यानिकी फसलों में सफलता मिलने के बाद पिछले साल एक बीघा जमीन में स्ट्रॉबेरी की फसल लेकर देखी। यह प्रयोग सफल रहा और आमदनी भी अच्छी मिली तो इस साल फसल का दायरा बढ़ाकर 4 बीघा कर दिया। इससे अब तक 25 लाख रूपए की आय प्राप्त कर चुका हॅू। अभी उत्पादन मिल रहा है। ऐसे में आय का आंकड़ा बढऩा तय है।

ऐसे बने नर्सरीमैन
उन्होने बताया कि खेती की जिम्मेदारी संभालने के बाद आधुनिक कृषि के तकनीकी ज्ञान के लिए आईसीएआर के अलग-अलग संस्थानों से प्रशिक्षण लेना शुरू किया। जब मुझे लगा कि कुछ नया किया जा सकता है तो सभी फलदार फसलों के मदर ब्लॉक तैयार करके पौधें तैयार करना शुरू कर दिया। इस काम की शुरूआत छोटे से भू-भाग से हुई। लेकिन, अब नर्सरी 3 बीघा जमीन अपने नाम कर चुकी है। नर्सरी में सभी उन्नत किस्मों के 40-50 हजार पौधें तैयार हो रहे है। इससे करीब 30 से 35 लाख रूपए सालाना की शुद्ध बचत मिल रही है।